भागते समय सायरन बजाया, पगली घंटी
जमशेदपुर/चाईबासा | मंगलवारको कोर्ट में पेशी के बाद मंडल कारा लौटते ही नक्सलियों ने जिस तरह से जवानों के साथ हाथापाई शुरू कर दी थी, वह उनके लिए अप्रत्याशित। इससे घबराए जेल के जवानों ने नक्सलियों के भागने के दौरान तो जेल का सायरन बजाया और ही जेल के पगली घंटी बजी।
नतीजतन नक्सलियों सहित सभी 15 बंदियों के भागने के क्रम में तुरंत उनकी घेराबंदी नहीं कर सकी। ऐसे में इन बंदियों को शहर से दूर भागने का भरपूर समय मिल गया। सूत्रों के अनुसार, सीआरपीएफ को भी घटना की पूरी जानकारी शाम करीब 5 बजे ही उपलब्ध करायी जा सकी। हालांकि घटना की जानकारी होते ही सीआरपीएफ के अफसरों ने फरार बंदियों की धरपकड़ के लिए आनन- फानन में मीटिंग की और प्लान तैयार किया।
साथ ही जवानों को फरार बंदियों की तलाश में कैंप से क्षेत्र में रवाना किया गया। फिलहाल 8 हार्डकोर नक्सलियों सहित फरार अन्य 15 बंदियों के जेल से भागने की घटना ने कई खामियों को उजागर कर दिया है। साथ ही मामले में कई बिंदुओं पर भी जांच हो सकती है। घटना के बाद से चाईबासा जिला एवं पुलिस प्रशासन सकते में है। पूरी घटनाक्रम के हर बिंदु पर तहकीकात करने में जुट गई है। इसे लेकर पुलिस प्रशासन के आलाधिकारियों ने अपने मतहतों के साथ हर स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है।
इन बिंदुओं पर भी हो सकती है जांच
>बंदियों को जेल से लाने और ले जाने के पूर्व ड्रील फाॅलो क्यों नहीं हुआ।
> जेल के मेन गेट के बाद खड़े पुलिस के जवान बंदियों को भागने से क्यों नहीं रोक पाए।
> बंदियों के भागने के क्रम में जेल का सायरन पगली घंटी क्यों नहीं बजा।
> मेन गेट के अंदर जेल परिसर में मौजूद जवान कहां थे और क्या कर रहे थे।