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इस पर लुटाऊंगी सबकुछ : खातून

7 वर्ष पहले
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ट्रक के नीचे छोड़ गए नवजात को, गैर बने पालनहार

कदमागणेश पूजा मैदान के पास रविवार की रात 11 बजे एक बच्ची पाई गई। मेला की भीड़ खत्म होने के बाद बच्चे के रोने की आवाज सुनकर वहां मौजूद लोग परेशान हो गए। लोगों ने बच्चे को ढूंढने का प्रयास किया। मंगल सिंह क्लब के पास खड़े एक ट्रक के पहिए के पास झोले में 20 दिन की बच्ची पाई गई।

बच्चीको मार डालने की मंशा

मामलेमें प्रत्यक्षदर्शी कदमा थाना शांति समिति के सदस्य मो. सिकंदर ने बताया कि बच्ची को ट्रक के पहिए के नीचे इस तरह रखा गया था कि ट्रक के थोड़े से आगे-पीछे होते ही बच्ची दब जाती। उन्होंने आशंका जताई कि बच्ची को मार डालने की नियत से ही किसी ने उसे इस तरह छोड़ दिया था, क्योंकि बच्ची की मौत होने पर ट्रक के कर्मचारी ही दोषी करार दिए जाते।

क्या है प्रक्रिया

चाइल्डवेलफेयर कमेटी के अनुसार, गोद लेने की प्रक्रिया कानून के दायरे में है। अनाथ बच्चे को दो महीने तक कस्टडी में रखा जाता है। इस दौरान बच्चे के संबंध में जांच-पड़ताल की जाती है। दो माह बाद बच्चे को रांची स्थित एडॉप्ट सेंटर निर्मल शिशु मिशन भेजा जाता है। वहीं से गोद देने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके पूर्व यदि बच्चे के परिजन दावा करते हैं, तो जांच के बाद बच्चा उन्हें सौंप दिया जाता है। जरूरत पडऩे पर डीएनए टेस्ट भी कराई जाती है। साथ ही सामने आने वाले माता-पिता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाती है।

कानूनी पेंच में फंसी गोद लेने की प्रक्रिया

कदमाथाना की पुलिस ने मो. जमील आयशा को बच्ची ले जाने की इजाजत दे दी। साथ ही न्यू बाराद्वारी स्थित मदर टेरेसा चाइल्ड होम से कानूनी प्रक्रिया पूरी करने को कहा। लेकिन, जब दोनों चाइल्ड होम पहुंचे। वहां किसी अनाथ को गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने की बात कहकर आयशा से बच्ची को ले लिया गया। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की चेयरपर्सन प्रभा जायसवाल ने कहा कि कानून इस तरह बच्चे को गोद लेने की छूट नहीं देता है। लेकिन, जमील आयशा बच्ची को छोडऩे को तैयार नहीं थे। उन्होंने मानवता ममता की दुहाई देते हुए बच्ची को उन्हें सौंपने का आग्रह किया। जब अधिकारी अपनी बात पर अड़ रहे, तो नि:संतान दंपती बच्ची के लिए गिड़गिड़ाने लगे। बच्ची के प्रति दंपती के प्रेम को देखते हुए चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सदस्य भी नरम पड़ गए।

कदमा की आयशा ने अपनाया

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