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रांची जाएंगे कांग्रेसी

7 वर्ष पहले
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शपथग्रहण का पिता भाई बनेंगे गवाह

विधायक को जेल की बजाए दिया मंत्री पद

जुझारूपन से मिली सफलता

जमशेदपुरपश्चिमी के विधायक बन्ना गुप्ता हेमंत सोरेन सरकार में बतौर मंत्री शनिवार को शपथ लेंगे। पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के इस्तीफा देने के बाद यह पद हाल ही में खाली हुआ था। बन्ना गुप्ता के संघर्ष की कहानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह ही कुछ हद तक मिलती-जुलती है। मोदी पिता के साथ जहां दुकान में चाय बेचते थे, वहीं बन्ना भी कदमा बाजार स्थित पिता रामगोपाल गुप्ता की चाय, सिंघाड़ा और मिठाई की दुकान में उनका हाथ बंटाते थे। पांच भाई- बहनों में बन्ना सबसे छोटे हैं। 15 वर्ष की किशोरावस्था में ही बन्ना का झुकाव राजनीति की ओर हो गया। स्थानीय युवकों की समस्याओं के समाधान के लिए वह कदमा में युवा संघर्ष समिति का गठन कर उसका सर्वेसर्वा बन गए। 1990 में समाजवादी जनता पार्टी के जरिए सक्रिय राजनीति में आए। उनके जुझारूपन को देखते हुए उन्हें शिक्षित बेरोजगार टेंपो चालक संघ का अध्यक्ष बना दिया गया।

उन्होंने टेंपो चालकों की समस्याओं के समाधान के लिए जमकर संघर्ष किया। इस दौरान उन्हें पुलिस की लाठियां भी खानी पड़ी। इतना ही नहीं, उन्हें जेल भी जाना पड़ा, बावजूद इसके वह जन संघर्षों और आमजन की समस्या से बिमुख नहीं हुए। वह लोगों की समस्या के समाधान के लिए आवाज बुलंद करते रहे। वर्ष 2000 वे समाजवादी पार्टी में शामिल हुए, तो उन्हें पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। उसी वर्ष यानी 2000 में ही उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें सफलता हाथ नहीं लगी। 2005 में भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लगातार हार के बाद भी बन्ना टूटे नहीं, बल्कि और ताकत से जनता की आवाज बुलंद करते रहे। 2009 में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। कांग्रेस ने उन्हें विधानसभा का टिकट दे दिया और बन्ना चुनाव जीत गए। इस साल कांग्रेस के टिकट पर कोल्हान से जीतने वाले वह एकमात्र विधायक थे। इस जीत से बन्ना का पार्टी में कद और बढ़ गया। बन्ना इससे पहले भी मंत्री की दौड़ में शामिल थे। लेकिन उस समय योगेंद्र साव ने बाजी मार ली थी। योगेंद्र साव ने इस्तीफा दिया, तो कांग्रेस ने उन्हें मंत्री के लिए सर्वसम्मति से चुन लिया।

शिक्षित बेरोजगार टेंपो चालक संघ को संगठित कर उसके अध्यक्ष बने। 9 वर्षों तक लगातार समाजवादी पार्टी के प्रदेश