संस्कृति में विज्ञान : प्रो. पंडा
जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज की ओर से संस्कृत वांड्.मय में वैज्ञानिक तत्व विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का शनिवार को समापन हो गया। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित इस सेमिनार के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि जगन्नाथपुरी संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गंगाधर पंडा उपस्थित थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति विज्ञान से ओतप्रोत है। यहीं से शून्य की उत्पत्ति हुई है। उन्होंने आयुर्वेद में वर्णित विज्ञान तत्व पर भी विचार व्यक्त किया। कार्यक्रम में सम्मानित अतिथि के रूप में दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति कामेश्वर सिंह, विशिष्ट अतिथि कोलकाता के आयकर आयुक्त डाॅ श्वेताभ सुमन, प्रो. नीलिमा पाठक प्राचार्य डाॅ. डीपी शुक्ल मौजूद थे।
समापन समारोह में आए अतिथियों का स्वागत कॉलेज के प्रिंसिपल डाॅ. डीपी शुक्ल ने किया। फिर संगोष्ठी के संयोजक डाॅ प्रसून दत्त सिंह ने तीन दिवसीय कार्यक्रम का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इसी क्रम में अमेरिका से आईं संस्कृत की विद्वान बेरोमिका ने संस्कृत और अंग्रेजी में व्याख्यान देकर संगोष्ठी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि शोधपत्रों के सफल वाचन से संस्कृत जगत के अतिरिक्त जन सामान्य में इसके वैज्ञानिक तत्वों से होगा। माथाभांगा कॉलेज कोलकाता के संस्कृत के प्राध्यापक प्रो. श्याम कुमार झा ने कहा यह संगोष्ठी संस्कृत के युवा प्रतिभागियों के लिए लाभप्रद रही।
कार्यक्रम को संबोधित करते डॉ. डीपी शुक्ला उपस्थित अन्य अतिथि।
सकारात्मक सोच विशेष हितकर : डॉ सुमन
डॉ श्वेताभ सुमन ने सकारात्मक सोच को मानव कल्याण के लिए विशेष हितकर बताया। उन्होंने कहा मुझे मातृभाषा में बोलने पर गर्व की अनुभूति होती है। उन्होंने संस्कृत को सभी भाषाओं की जननी बताया। प्रो. नीलिमा पाठक ने कहा कि भारतीय संस्कृति के उन्नयन के लिए संस्कृत की अत्यंत जरूरत है। वेद के मंत्रों को सस्वर प्रस्तुत करते हुए कहा कि सृष्टि के विकास में इनका महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने शब्द के वैज्ञानिक तत्व पर विचार प्रस्तुत की। समारोह के सम्मानित अतिथि प्रो. चंद्रकांत शुक्ल ने संगोष्ठी के महत्व पर विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमारी चेतना तब जागृत होती है, जब विदेशी ठप्पा लगा देते हैं। वेद को वेदा और योग को योगा कहा जाता है, तब