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जिले में हिंदी शिक्षकों के 69 प्रतिशत पद रिक्त

7 वर्ष पहले
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देशभर में 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाएगा। इस दिन लोग हिंदी के विकास का संकल्प लेते हैं। सरकार भी इसके लिए बड़े-बड़े वादे करती है। लेकिन, जिले के सरकारी स्कूलों में हिंदी की स्थिति काफी दयनीय है। आलम यह है कि अंग्रेजी के प्रभाव के आगे हिंदी दबती जा रही है।

>>कुल उच्च विद्यालय : 58

>>शिक्षकोंके पद : 644

>>कार्यरतशिक्षक : 245

>>रिक्तपद : 399

विषय कुल पद कार्यरत रिक्त प्रतिशत

हिंदी 7122 49 69

अंग्रेजी6834 34 50

प्लसटू स्कूलों के आंकड़े

हिंदी 1104 07 63

अंग्रेजी1105 06 54

एक नजर

यहां भी हिंदी से आगे अंग्रेजी

जिलेके उच्च विद्यालयों प्लस टू विद्यालयों में शिक्षकों का अनुपात देखें, तो यहां हिंदी से आगे अंग्रेजी है। जिले के 58 उवि में हिंदी के 22 शिक्षक हैं, जबकि अंग्रेजी के 34 शिक्षक कार्यरत हैं। जिले के प्लस-2 स्कूलों में हिंदी अंग्रेजी के शिक्षकों का अनुपात 4:5 है।

हिंदी दिवस पर भले ही शहर की विभिन्न संस्थाएं कार्यक्रम आयोजित करें। लेकिन, जिले का शिक्षा विभाग ऐसा कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं करेगा। इसके साथ ही विभाग ने अब तक सरकारी स्कूलों में हिंदी दिवस मनाने के संबंध में भी कोई भी आदेश नहीं जारी किया है।

विभाग नहीं करेगा कार्यक्रम आयोजित

निजी स्कूलों में हिंदी के प्रति उदासीनता तो सबके सामने है। लेकिन, सरकारी स्कूल भी कम नहीं हैं। किसी भी भाषा के विकास में शिक्षकों का अहम योगदान होता है। लेकिन, जिले के सरकारी उच्च विद्यालयों पर नजर डालें, तो यहां भी हिंदी से आगे अंग्रेजी है और हिंदी के शिक्षकों की संख्या काफी कम है। जिले के 58 उच्च विद्यालयों में हिंदी के शिक्षकों के 71 पद सृजित किए गए हैं, लेकिन वर्तमान में मात्र 22 शिक्षक ही कार्यरत हैं। 40 ऐसे विद्यालय हैं, जहां हिंदी के एक भी शिक्षक नहीं हैं। दूसरी ओर, 11 प्लस-टू स्कूलों में हिंदी के 11 पद हैं। इनमें चार शिक्षक कार्यरत हैं और सात पद खाली हैं। सात ऐसे स्कूल हैं, जहां हिंदी भाषा के एक भी शिक्षक नहीं हैं। इस तरह देखा जाए, तो हाई स्कूलों में 69 प्लस स्कूलों में 50 प्रतिशत हिंदी शिक्षकों के पद खाली हैं।

विद्यालयों में एक तिहाई ही शिक्षक