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नि:शक्त बच्चों की जिंदगी संवार रहे हैं पूर्व एथलीट

7 वर्ष पहले
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मानसिकरूप से कमजोर (नि:शक्त) बच्चों को आमतौर पर समाज में उपेक्षा की दृष्टि से देखा जाता है। इन बच्चों के प्रति ज्यादातर लोग मन में यह अवधारणा पाल लेते हैं कि ये बेकार हैं, इनसे कुछ होगा नहीं। लेकिन इन्हीं बच्चों के जीवन में रंग भरने और उन्हें सबल बनाने का बीड़ा उठाया है पूर्व अंतरराष्ट्रीय साइकिलिस्ट अवतार सिंह ने। इस नेक कार्य में अवतार सिंह की प|ी सुखदीप कौर भी उनका कदम दर कदम साथ निभा रही हैं।

अवतार ऐसे बच्चों की मदद के लिए जीविका नामक संस्था चलाते हैं। संस्था के माध्यम से बच्चों को सबसे पहले प्राथमिक शिक्षा दी जाती है। इसके बाद उन्हें रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण दिया जाता है। ताकि ये बच्चे आत्मनिर्भर होकर अपने को सबल बनाने के साथ समाज में अपनी अलग पहचान बना सकें। इस क्षेत्र में बेहतर सेवा के लिए बिहार की एक संस्था अवतार सिंह को डॉ राजेंद्र प्रसाद सेवा सम्मान से सम्मानित कर चुकी है। अवतार सिंह नेशनल साइकिलिंग चैंपियनशिप का सात बार खिताब जीत चुके हैं। उन्होंने 1978 में कनाडा में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स और 1982 में दिल्ली में आयोजित एशियन गेम्स में भारतीय साइकिलिंग टीम का नेतृत्व भी किया है।

अलग-अलग लेवल में दिया जाता है प्रशिक्षण

इनबच्चों को प्रशिक्षण देने के लिए तीन अलग- अलग लेवल में बांटा गया है। प्रशिक्षण देने के लिए संस्था ने दो शिक्षक भी नियुक्त किया है। आर्ट प्रशिक्षण के लिए पार्ट टाइम आर्टिस्ट को यहां बुलाया जाता है। प्रशिक्षण देने वालों को संस्था की ओर से भुगतान किया जाता है। वहीं स्कूल में आने वाले 20 फीसदी सामान्य परिवार के बच्चों से मासिक 300 रुपए शुल्क लिया जाता है।

रिटायर होने के बाद 2009 में किया जीविका का गठन

टाटामोटर्स से सेवानिवृत्त होने के बाद अवतार सिंह ने 2009 में जीविका नामक संस्था की शुरुआत की। दो साल तक काम करने के बाद 2011 में संस्था का निबंधन करवाया गया। संस्था के संचालन के लिए सुभाष संघ की ओर से उन्हें सोनारी में भवन उपलब्ध कराया गया। यहां वह फिलहाल 23 नि:शक्त बच्चों को सामान्य शिक्षा के साथ स्पेशल गेम्स का प्रशिक्षण दे रहे हैं। इन बच्चों को यहां रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण जैसे गिफ्ट पेपर बैग, शगुन बैग,दीया, वैक्स दीया आदि बनाना भी सिखाया जाता है। इसके लिए चार छात्रों को संस्था की ओर से छात्रवृत्ति भी दी जाती है।

शिक्षा के साथ रोज