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एसडीओ करेंगे मतदान केंद्र का निर्धारण

6 वर्ष पहले
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मतदानकेंद्र का निर्धारण मतदाता सूची का प्रकाशन धालभूम के एसडीओ प्रेमरंजन करेंगे। वे मतदाता सूची का विखंडीकरण भी करेंगे। इस काम के लिए पहले यूनियन के पदाधिकारियों और कर्मचारियों की सहायता ली जाती थी। इस बार कर्मचारी चुनाव कार्य से अलग रहेंगे और यूनियन के पदाधिकारी केवल दावा और आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। नोडल पदाधिकारी के रूप में एडीसी सुनील कुमार रहेंगे।

यूनियन चुनाव के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले एलडी-2 के कमेटी मेंबर धर्मेंद्र उपाध्याय ने चुनाव के लिए डीसी द्वारा उठाए गए कदम को एेतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा है कि डीसी ने सरकारी अधिकारियों की चुनाव कमेटी बनाकर इतिहास रच दिया है। यह कदम सराहनीय है। इससे निर्वाचन क्षेत्र बनाने और बिगाड़ने के नाम पर कमेटी मेंबरों को धमकाने का खेल बंद होगा।

नामांकन पत्र प्रारूप का होगा प्रकाशन

नामांकनपत्र प्रारूप के प्रकाशन की जिम्मेवारी विधि शाखा के वरीय प्रभारी उप समाहर्ता अनिल कुमार राय को सौंपी गई है। नामांकन पत्र के प्रारूप के प्रकाशन के साथ उसकी जांच भी उप समाहर्ता ही करेंगे। प्रत्याशियों की जमानत राशि का फैसला भी अनिल कुमार राय को ही करना है।

मोबाइल ले जाने पर रोक

चुनावमें प्रत्याशियों के मतदान स्थल या मतगणना स्थल पर मोबाइल ले जाने पर रोक रहेगी।

कमेटी मेंबरों को किसी के पीछे भागना नहीं पड़ेगा

^निर्वाचनक्षेत्रबनाने के लिए कमेटी मेंबर हर ग्रुप में दौड़ा करते थे, अब उन्हें दौड़-भाग नहीं करनी पड़ेगी। डीसी पर पूरा भरोसा है। निर्वाचन क्षेत्र बना कर चुनाव होना चाहिए।\\\' संजीवकुमार चौधरी, डिप्टी प्रेसिडेंट

डीसी-एसएसपी पर पूरी अास्था

^डीसी और एसएसपी पर पूरा अास्था है। एेसा लगता है कि अब निष्पक्ष चुनाव होगा।\\\' रघुनाथपांडे, विपक्ष के नेता, टाटा वर्कर्स यूनियन में

कार्यक्रम अच्छा है

^चुनावका कार्यक्रम बहुत अच्छा है। प्रशासन अच्छी तरह से ही चुनाव कराएगा। जितनी जल्दी चुनाव हो, उतना अच्छा है।\\\' भगवानसिंह, एसएमडी के कमेटी मेंबर

प्रशासन का कदम सराहनीय

^चुनावके संबंध में उपायुक्त द्वारा उठाया गया कदम सराहनीय है। चुनाव बढ़िया से हो जाए, ऐसी कामना है। कोई और आगे केस मुकदमा करने के लिए जाए, ऐसा लगता है।\\\' सतीशकुमार सिंह, यूनियन के सहायक सचिव

निर्वाचन क्षेत्र के आधार पर हो चुनाव : नीतेश राज

टाटास्टील सीआरएम के कमेटी मेंबर नीतेश राज ने टाटा वर्कर्स यूनियन (टीडब्ल्यूयू) का चुनाव निर्वाचन क्षेत्र के आधार पर कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि एक-दो दिन में कमेटी मेंबरों का एक प्रतिनिधिमंडल डीसी डॉ अमिताभ कौशल से समय लेकर मिलेगा।

डीसी द्वारा गठित पांच सदस्यीय टीम ही टाटा स्टील प्रबंधन से किसी भी तरह की जानकारी मांगेगी। चुनाव के लिए यूनियन या कंपनी प्रबंधन स्थान उपलब्ध कराएगा।

आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत आने पर निर्वाची पदाधिकारी मामले की जांच करेंगे। आरोप सही पाए जाने पर चुनावी प्रक्रिया चाहे किसी भी चरण में क्यों हो, संबंधित लोगों का नामांकन रद्द कर दिया जाएगा।

पुलिस बल की होगी तैनाती

टाटावर्कर्स यूनियन के चुनाव के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये जाएंंगे। इस संबंध में डीसी डॉ अमिताभ कौशल ने एसएसपी को कार्रवाई का आदेश दिया है। दंडाधिकारी के साथ पुलिस के जवानों को तैनात किया जाएगा।

पांच सहायक निर्वाची पदाधिकारी तैनात

निर्वाचीपदाधिकारी सुनील कुमार को सहयोग करने के लिए पांच सहायक निर्वाची पदाधिकारियों को तैनात किया गया है। इनमें जमशेदपुर के सीओ मनोज कुमार, पोटका के सीओ संजय पांडे, धालभूम की कार्यपालक दंडाधिकारी यस्मिता सिंह, अनिता केरकेट्टा ललिता बाखला शामिल रहेंगी। निर्वाचन की अधिसूचना, नामांकन की तिथि, नामांकन पत्रों की जांच, प्रत्याशियों की सूची, मतपत्रों का प्रकाशन, मतदान कराने और परिणाम की घोषणा की जिम्मेदारी एडीसी की है।

डीसी डॉ अमिताभ कौशल के हस्ताक्षर वाली सात पृष्ठ की सूचना टाटा वर्कर्स यूनियन कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर लगाई गई है। इसमें पूरे चुनाव कार्यक्रम की जानकारी दी गई है। नोटिस पढ़ने के लिए यूनियन कार्यालय में कर्मचारियों की भीड़ लगी रही। शाम तक यूनियन में काेई चहल-पहल नहीं थी, लेकिन 7.30 बजे जैसे ही नोटिस बोर्ड पर चुनाव से संबंधित जिला प्रशासन द्वारा भेजा गया कार्यक्रम लगाया गया, वहां चहल-पहल बढ़ गई। इसके बाद चुनाव कैसे होगा, इस पर कर्मचारियों के बीच चर्चा शुरू हो गई है। कर्मचारियों के बीच चर्चा इस बात को लेकर है कि चुनाव ग्लोबल या निर्वाचन क्षेत्र बनाकर होगा। पिछला चुनाव ग्लोबल हुआ था, िजससे कई विभागों के कई सेक्शनों का प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया था।

टाटा वर्कर्स यूनियन का चुनाव विवाद रहित संपन्न करने के लिए प्रशासन ने कई स्तरों पर बदलाव किया है। यूनियन के बड़े नेताओं पर नकेल कसने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाए गए हैं। बड़े नेताओं की गतिविधियों पर प्रशासन की नजर रहेगी। प्रशासन उन स्थानों को चिह्नित कर रहा है, जहां से नेता चुनाव कार्य का संचालन करेंगे। चुनाव की पूरी प्रक्रिया से यूनियन के नेताओं और कर्मचारियों को अलग कर दिया गया है।

{ चुनाव तिथि की घोषणा के साथ आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इसके तहत टाटा स्टील प्रबंधन पर कई तरह की बंदिश लग गई है।

{ कंपनी प्रबंधन चुनाव होने तक किसी कर्मचारी का तबादला नहीं कर सकेगा। प्रबंधन तो किसी कर्मचारी का प्रमोशन कर सकेगा और ही दंडित कर सकेगा।

{ विशेष परिस्थिति में तबादला, प्रोन्नति या दंडित करना प्रबंधन के लिए जरूरी होगा, तो निर्वाची पदाधिकारी एडीसी सुनील कुमार से इसकी अनुमति लेनी होगी।

{ प्रबंधन की ओर से कोई भी ऐसा कार्य नहीं किया जाएगा, जिससे चुनाव की स्वतंत्रता निष्पक्षता प्रभावित हो।

{ अगर प्रत्याशी चुनाव के दौरान किसी को धमकाते या प्रलोभन देते हैं, तो इसे आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा।

{ जाति, धर्म, प्रांत या भाषा के नाम पर वोट मांगना भी आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा।

{ प्रत्याशी अगर सार्वजनिक स्थान पर सभा का आयोजन करेंगे और कंपनी परिसर के अंदर रैली निकालेंगे, तो उन्हें पूर्व में निर्वाची पदाधिकारी से अनुमति लेनी होगी।

टाटा वर्कर्स यूनियन के चुनाव कार्यक्रम के संबंध में प्रशासन द्वारा जारी आदेश की प्रति महासचिव बीके डिंडा को बुला कर सौंपी गई। उपायुक्त कार्यालय में शाम करीब छह बजे विधि शाखा के वरीय प्रभारी पदाधिकारी अनिल कुमार राय ने डिंडा को अपने कक्ष में बुलाया और चुनाव से संबंधित आदेश की प्रति की रिसीव करा दी। साथ ही डिंडा से यूनियन के बिष्टुपुर स्थित कार्यालय का फैक्स नंबर लिया गया। प्रशासन ने फैक्स पर आदेश की प्रति यूनियन कार्यालय को भी भेज दी। यूनियन चुनाव को लेकर काफी विवाद होता रहा है, इसलिए प्रशासन काफी सतर्कता बरत रहा है।

टाटा वर्कर्स यूनियन के चुनाव के लिए प्रशासन द्वारा बनायी गयी कमेटी पर महामंत्री बीके डिंडा ने ऊंगली उठायी है। उन्होंने कहा है कि कमेटी में केवल सरकारी कर्मचारियों को रखा गया है। कमेटी में यूनियन के किसी भी व्यक्ति को शामिल नहीं किया गया है, तो निर्वाचन क्षेत्र कैसे बनेगा ? क्या सरकारी कर्मचारियों को विभागों का स्ट्रक्चर पता है कि वे निर्वाचन क्षेत्र बना लेंगे? आखिरकार किससे सलाह ली जाएगी? इससे सवाल खड़ा होता है कि आखिर चुनाव कितना साफ -सुथरा होगा?