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श्रवण नक्षत्र में मनेगी महाशिवरात्रि

6 वर्ष पहले
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महाशिवरात्रिइस वर्ष 17 फरवरी (मंगलवार) को है। योग गणना पंचांग के अनुसार, मंगल योग में आने वाली शिवरात्रि विशेष फलदायी होती है। 20 साल बाद इस बार शिवरात्रि ऐसा ही शुभ संयोग लेकर रही है। इस दौरान पूजा-अर्चना, दान-पुण्य करने से समृद्धि आएगी।

पं. रमेश कुमार उपाध्याय शास्त्री ने बताया कि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी महाशिवरात्रि के रूप में मनाई जाती है। इस बार शिवरात्रि के एक दिन पहले और एक दिन बाद विशेष संयोग है। मंगल योग में महाशिवरात्रि होने से भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना करने से हर मनोकामना पूरी होगी।

18 फरवरी को बुधावती अमावस्या

शिवरात्रिके अगले दिन बुधावती अमावस्या रहेगी। बुधवार को होने वाली अमावस्या पुण्य में वृद्धि करने वाली होती हैं। यह शुभदायी और फलदायी है।

16 फरवरी को सोमप्रदोष

शिवरात्रिके एक दिन पहले सोमवार को प्रदोष है। इस दिन सोम-प्रदोष का संयोग बनेगा। इस दिन व्रत-शिव पूजा विशेष फलदायी होगी।

पंडित रमेश कुमार ने बताया कि भगवान शिव की पूजा चारों पहर होती है। वैसे इस महाशिवरात्रि पर प्रात:काल में 6.29 से 7.47 बजे तक कुंभ लग्न और सुबह 10.52 बजे से 12.28 बजे वृश्चिक लग्न में पूजा का शुभ मुहूर्त है। वहीं, उत्तम समय पूजा शाम 7.34 से रात रि 9.47 बजे तक है। उन्होंने कहा कि शिवरात्रि में रात्रि पूजा का विशेष महत्व है।