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धर्म इंसानियत का पैगाम देता है : हसन

6 वर्ष पहले
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{देश की एकता के लिए समुदायों में बढ़ रही गलतफहमियों को दूर करना जरूरी

{कपाली में जमित-ए-उलेमा ने आयोजित किया राष्ट्रीय एकता कॉन्फ्रेंस

सिटीरिपोर्टर|जमशेदपुर

कपालीमें रविवार की शाम जमित-ए-उलेमा की सिंहभूम इकाई के तत्वावधान में कौमी एकजहती (राष्ट्रीय एकता) कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मौजूद जमियत के उलेमा और अन्य वक्ताओं ने कहा कि देश की एकता के लिए जरूरी है कि समुदायों में बढ़ रही गलतफहमियों को दूर किया जाए। इसके लिए प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देना और देश में इंसाफ का सभी के लिए सुगम करने का प्रयास करना भी जरूरी होगा।

मुफ्ती अमीरुल हसन ने कहा कि धर्म इंसानियत का पैगाम देता है। इस पर चल कर इंसानियत और देश की एकता को भी बेहतर तरीके से कायम रखा सकता है। मौलाना अतहर गजाली ने कहा कि देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए मुस्लिम वर्ग भी अपनी जान की बाजी लगाता है। जंग-ए-आजादी में मुसलमानों ने भी बड़ा बलिदान दिया। मुसलमान भी अपने मुल्क-ए-अजीज (प्यारे देश) के लिए सब कुछ निछावर करने में कभी पीछे नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि कुछ लोग धर्म के नाम पर और कुछेक की गलती के लिए सबको एक ही तराजू में तौलना सही नहीं होगा। मुसलमान भी मुल्क की तरक्की और एकता में कदम से कदम मिलाकर चलता है। कई उलेमाओं ने पैगंबर हजरत मोहम्मद (सअ) के पैगाम-ए- इंसानियत का जिक्र किया और कहा कि हमारे पैगंबर साहब ने शांति का पैगाम दिया है और इंसान ने प्रेम सिखाया है। मुफ्ती निशात, मौलाना जहूर अकरम, मौलाना कलीम, मौलाना हकीम समीउल्लाह मिफ्ताही, मौलाना आफाक, मौलाना हाफिज अनवर ने भी अपने विचार रखे।