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अधिकारों के प्रति सजग रहे उरांव समाज : विजय

6 वर्ष पहले
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जमशेदपुर | अखिलभारतीय आदिवासी महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष विजय कुजूर ने कहा कि उरांव समाज को अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति सजग होना चाहिए। आदिवासी समाज को तोड़ने का प्रयास करने वालों से सावधान रहे। यह जिला पांचवीं अनुसूची के दायरे में आता है। यहां ग्रामसभा की व्यवस्था सर्वोपरि है। ग्रामसभा की मर्जी के बगैर प्रशासन अथवा कॉरपोरेट जगत कुछ नहीं कर सकता। इस बारे में लोगों को जागरूक करे। उन्होंने यह बातें रविवार को जुबिली पार्क में आयोजित अखिल भारतीय कुड़ुख खोड़हा (उरांव समाज) के वार्षिक मिलन समारोह सह वनभोज में कहीं।

वनभोज को लेकर उरांव समाज के लोगों की सुबह सात बजे जुबिली पार्क के सुरक्षा कर्मचारियों के साथ बकझक भी हुई थी। उरांव समाज के लोग टेबल और कुर्सी लगा रहे थे, तो सुरक्षा कर्मचारियों ने मना किया। इसका आयोजकों ने प्रतिवाद किया। मिलन समारोह के दौरान इस मसले पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि झारखंड के खूंटकटी लोग पिकनिक मनाने आए हैं, तो उन्हें बेवजह परेशान नहीं करना चाहिए। समारोह में महासभा के जिलाध्यक्ष कृष्णा हांसदा ने कहा कि जो लोग अपनी भाषा और संस्कृति को जीवित रखेंगे, उनका कभी अंत नहीं होगा। जो जाति लड़ती है, उसे कभी अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। मिलन समारोह में पारंपरिक नृत्य हुआ। इसमें मार्शल देवगम, हरमोहन टुडू, अंजुल देवगम, गौरी टुडू, पप्पू बेसरा ने विचार रखे।

समारोह में मानगो, राहरगोड़ा, बिरसानगर, सोनारी, कदमा, परसुडीह, आदित्यपुर, सीतारामडेरा, एग्रिको, एनएमएल से लोग आए थे। मिलन समारोह के आयोजन में बिलचो लकड़ा, प्रभात तिर्की, जयतुन एक्का, जीवन कुमार लकड़ा, इरकन तिर्की, विजया तिग्गा, प्रमोदय किड़ो, एलिश तिग्गा, इम्मानुएल तिग्गा आदि सक्रिय रहे।

बर्मामाइंस कुआं मैदान में मिलन समारोह का उदघाटन करते अतिथि (बाएं) और डिमना चौक के पास आयोजित समारोह में समूह नृत्य करतीं युवतियां (दाएं)।