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जिनां सास गिरास बिसरे

6 वर्ष पहले
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जिनांसास गिरास बिसरे, हरि नामा मन मंत। धन से सेई नानका पूरण सोई संत...। अमृतमयी गुरवाणी से उक्त शब्द की व्याख्या करते हुए ढाडी जत्था भाई सुखजिंदर सिंह ने संगत को परमेश्वर का नाम जपने को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जो वाहेगुरु का नाम लेते हुए दुनिया से गए हैं, वह हमेशा अमर हैं। उन्होंने कहा कि बाबा दीप सिंह की जितनी मान्यता उनके रहते हुए नहीं हुई, आज उससे कई गुणा ज्यादा हो रही है। ज्ञानी सुखजिंदर सिंह ने बाबा दीप सिंह की जीवनी पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दीप सिंह सूरवीर जत्थेदार थे। उन्होंने जो कहा करके दिखाया। वे सीतारामडेरा सेंटर मैदान में चल रहे महान कीर्तन दरबार के दूसरे दिन मंगलवार को संगत को गुरु उपदेशों से गुरसिख बनने के लिए प्रेरित कर रहे थे।

दीवान के दौरान भाई देवेंद्र सिंह हजूरी रागी दरबार साहिब ने ‘ऐह जो दुनिया सेहर मेला दसतगिरि नाहें। बंदे खोज दिल हर रोज फेर परेशानी माहे...’ शब्द को संगत की मांग पर मधुर आवाज में सुंदर ढंग से गाया। अमृतसर से पहुंचे हजूरी रागी दरबार साहिब भाई इंदरजीत सिंह ने भी ‘तेरे भरोसे प्यारे मैं लाड लडाया...’ और ‘एक दाते एक मंगते सभना सिर सोए...’ गुरवाणी कीर्तन की प्रस्तुति दी। इससे पूर्व सुबह बीबी तजिंद्र कौर और बच्ची सिमरजीत कौर मनवीत कौर ने भी संगत को गुरुजस में लीन किया।

34 ने ली खंडे दी पाहुल, बने गुरसिख

श्रीगुरु गोबिंद सिंह जी की बख्शीश खंडे बाटे की पाहुल मंगलवार को 34 लोगों (बच्चे, महिला पुरुषो) ने ली और गुरु के सिंह सजे। सीतारामडेरा गुरुद्वारा परिसर में दोपहर दो बजे अकाली दल के जत्थेदार जरनैल सिंह की अध्यक्षता में अमृत का बाटा तैयार किया गया। पंज प्यारों की भूमिका जरनैल सिंह, सुखदेव सिंह खलासा, भूपेंद्र सिंह, जसवंत सिंह जस्सू, हरजीत सिंह ने निभाई, जबकि रवींद्र सिंह, रवींद्रपाल सिंह, गुरदीप सिंह, रामकिशन सिंह, प्रीतपाल सिंह, बलदेव सिंह, अवतार सिंह आदि ने सहयोग किया।

येथे उपस्थित

सरदारशैलेंद्र सिंह, इंदरजीत सिंह, जसवंत सिंह भोमा, जोगिंदर सिंह दीप, गुरचरण सिंह भोगल, जसबीर सिंह, गुरमुख सिंह मुखे, बीबी कमलजीत कौर, गुरमीत कौर, सतवंत कौर, सुखजीत कौर, हरदीप सिंह छनिया आदि।

इनकारहा सहयोग

जोड़ासेवा करने में जेम्को नौजवान सभा, गुरुद्वारा प्रधान करम सिंह, बलबीर सिंह, सुरजीत सिंह, गुरपाल सिंह, अमरजीत सिंह, अविनाष सिंह, नरेंद्र सिंह, सुखविंदर सिंह, त्रिलोक सिंह, सरबजीत सिंह, चरणजीत सिंह, मनमीत सिंह, अरबिंदर सिंह नागी, देवेंद्र सिंह, गुरदीप सिंह आदि।

संगत के बीच लंगर वितरित, कई सम्मानित

बाबादीप सिंह के शहीदी दिवस को समर्पित कीर्तन दरबार के दूसरे दिन भी दोपहर में संगत ने गुरु का अटूट लंगर ग्रहण किया। सुबह के दीवान में एवरेस्ट के बेस कैंप तक चढ़ने वाले गुरशरण सिंह, टिनप्लेट अस्पताल के डॉ राजेंद्र सिंह, गुरमत प्रचार सेंटर, धर्म प्रचार कमेटी के प्रतिनिधि को सम्मानित किया गया। शाम को भी रहिरास साहिब के बाद रात 11.30 बजे तक दीवान सजा, जिसमें संगत ने बढ़-चढ़ कर गुरु दरबार में हाजरियां भरीं।

प्रदर्शनीको युवा वर्ग ने सराहा

दीवानके दूसरे दिन भी संगत ने तरन-तारन से पहुंची प्रदर्शनी का अवलोकन किया। खासकर युवा वर्ग ने इसे सराहा। वे सिख गुरु शहीदों की शहीदी को देखकर भावुक हुए। उन्होंने सदस्यों से जीवनी का विस्तार जाना।

सीतारामडेरा गुरुद्वारा में कीर्तन सुनते श्रद्धालु।

सीतारामडेरा गुरुद्वारा में कीर्तन करते रागी।