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पैगंबर हजरत थे आखिरी नबी

6 वर्ष पहले
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जमात-ए-इस्लामीके सीरत मुहिम पखवाड़े के तहत रविवार को टेल्को बारीनगर स्थित मिल्लत हॉल में हजरत मोहम्मद (सअ) सबके लिए विषयक कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम का आगाज मौलाना अफ्फन सल्फी के कुरान पाठ से हुआ। इस अवसर पर चंद्रेश्वर खां, जफर इमाम, अहमद रियाज शमीम मदनी वक्ता थे।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि पैगंबर हजरत मोहम्मद (सअ) केवल मुसलमानों के पैगंबर थे, बल्कि वे सारी दुनिया और सारे लोगों के लिए पैगंबर बनाकर भेजे गए। उनकी तालीमात और इस्लाम की बातें मुसलमानों के अलावा अन्य लोगों को दी चाहिए, ताकि विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच दूरी कम हो। जफर इमाम ने कहा कि पैगंबर हजरत मोहम्मद (सअ) इस संसार के लिए आखिरी नबी हैं। उनके बाद कोई दूसरा नबी नहीं आएगा।

कार्यक्रम में उपस्थित स्थानीय लोग।

मोहम्मद के तालीमात प्रासंगिक : अहमद

रिषजअहमद ने कहा कि पैगंबर हजरत मोहम्मद (सअ) का पवित्र जन्म 571 ईस्वी में हुआ था। आज 1400 साल से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी उनकी तालीमात प्रासंगिक और उतनी ही अहमियत रखती है, जो उस जमाने में थी। टाटा मोटर्स के पूर्व सीनियर एजीएम चंद्रेश्वर खां ने कहा कि उन्होंने हजरत मोहम्मद (सअ) की जीवनी पढ़ी है। उनकी शिक्षा इंसानियत के लिए मिसाल है। उन्होंने बताया कि एक कार्यक्रम में उन्हें कुछ लोग मिले। सबके नाम के आगे मोहम्मद जुड़ा था। इस पर उन्होंने कहा कि इस मोहम्मद (सअ) के नाम का उपयोग और उनकी शिक्षा को अपने में आत्मसात करें, तो समझा जागा कि आप कामयाब लोग हैं।

टेल्को के बारीनगर में आयोजित कार्यक्रम में मंच पर बैठे अतिथि।