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भगवान हमारे हृदय में रहते हैं : भूमानंद

6 वर्ष पहले
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विकासकेंद्र ब्रह्म विद्या सेंटर (सोनारी) में चुड़ामणि पर आधारित कक्षा का मंगलवार को पहला दिन था। इसमें स्वामी भूमानंद तीर्थ ने कहा कि हमलोग मैं का उपयोग हमेशा करते हैं लेकिन मैं को नहीं जानते हैं। यह वह उपस्थिति है, जो जड़ शरीर में उपस्थित रहकर उसे सक्रिय बनाती है। यही मैं आत्मा है, जो दृष्टा (देखने वाला) कहलाता है। सभी विषयों को बोध करना वैसा ही है विषय (आत्मा) भी है। आध्यात्मिकता में यही विषय आत्मा या भगवान है। धार्मिकता में भगवान कहीं दूर अवस्थित रहते हैं। लेकिन वास्तव में वे हमारे दिल में रहते हैं।

इधर, सांध्यकालीन सत्र में केरल से आईं स्वामीजी की शिष्या मां गुरु प्रिया ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचार करना है।