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कहानियों के कथ्य-शिल्प बदले : डॉ विष्णुदेव तिवारी
सिंहभूमजिला हिंदी साहित्य सम्मेलन की ओर से रविवार को तुलसी भवन में आधुनिक कहानियों पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें बक्सर के साहित्यकार डॉ विष्णुदेव तिवारी ने कहा कि समकालीन कहानियों का कथ्य और शिल्प लगातार बदलता जा रहा है। डॉ तिवारी ने कहानियों के उद्देश्य के साथ उसकी शुरुआत और समापन पर प्रकाश डाला।
रांची से आए डॉ बालेंदु शेखर तिवारी ने अपने संबोधन में कहानी लेखन की उपयोगिता बताई। कहानी के बिखरे तिनके और उसके स्नेह बंधन पर लक्ष्मीरानी लाल और डॉ मीरा झा ने विस्तृत प्रकाश डाला।
इसके पहले स्वागत भाषण डॉ.नर्मदेश्वर पांडेय ने दिया। उन्होंने कहा कि मानवीय मूल्यों के सम्यक विकास और मानवीय संवेदना में गुणात्मक सुधार के लिए सिंहभूम जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन की ओर से हर साल यह आयोजन होता है। मानव संवेदनाओं के क्षरण की इस बेला में जब मानव अपने परिवार में सिमटता जा रहा है और उसकी सोच एकांगी होती जा रही है, ऐसे में कहानियों पर चर्चा प्रासंगिक हो गई है। उन्होंने कहा कि पहले दादी मां की कहानियां अबोध मानव मन में चेतना की नई स्फूर्ति जगाने का काम करती थी। पंचतंत्र और जातक कथाएं समाज में संवेदना जागरण का काम करती थीं।
मौके पर डॉ बच्चन पाठक सलिल, अजय ओझा, मंजू ठाकुर, उदय प्रताप हयात, अरुण कुमार अरुणेंदु, कृष्णानंद पांडेय, वैद्यनाथ ठाकुर, कैलाशनाथ शर्मा, अरविंद विद्रोही, नीलिमा पांडेय, शैलेंद्र कुमार, उमेश चतुर्वेदी आदि उपस्थित थे।
तुलसी भवन में हिन्दी साहित्य सम्मेलन को संबोधित करते अतिथि।