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उत्पादन लागत कम करने के लिए टास्क फोर्स का किया गठन

6 वर्ष पहले
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टाटास्टील की उत्पादकता प्रति कर्मचारी 400 टन और जिंदल स्टील में 1000 टन के आसपास है। इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए कंपनी ने एक रोड मैप तैयार किया है। इसमें उत्पादकता बढ़ाने और उत्पादन लागत कम करने के लिए अलग-अलग टास्क फोर्स का गठन किया है।

कंपनी बिना अपना आयरन ओर के देशी कंपनियों से कैसे मुकाबला करे, इसे लेकर रणनीति बनाई गई है। हाल में आयरन ओर के संकट से पता चला कि मार्केट अायरन ओर खरीदने पर उत्पादन लागत बढ़ रही है, क्योंकि इसकी उत्पादकता देशी कंपनियों से आधे से भी कम है।

यूनियनकी अस्थिरता से प्रबंधन असमंजस में

यूनियनकी अस्थिरता से प्रबंधन असमंजस की स्थिति में है। कंपनी का ईबीआईटीडीए यानि अर्निंग बिफोर इंटरेस्ट टैक्सेस डिप्रेसिएशन एंड एमोरटाइजेशन जिंदल स्टील का 28 प्रतिशत है, जबकि टाटा स्टील का 11 प्रतिशत के अासपास है। कंपनी इसे पांच साल में बढ़ाकर 25 प्रतिशत करना चाहती है। यह दो ही स्थिति में होगी। पहली वर्तमान मैन पावर में ही उत्पादन को बढ़ाया जाए। दूसरा शेयर्ड सर्विसेज को आउटसोर्स कर दिया जाए, ताकि मैन पावर कम हो जाए और उत्पादकता बढ़ जाए।

क्रेनऑपरेटरों पर बोझ बढ़ाने की तैयारी

इसकड़ी में सबसे पहले क्रेन ऑपरेटर आने वाले हैं। क्रेन ऑपरेटरों का चार घंटे काम करना और चार घंटे आराम करना प्रबंधन को अखर रहा है, इसलिए उनका कार्य बढ़ाकर 6 घंटा और आराम 2 घंटा करने की पहल शुरू हो गई है। इसके लिए क्रेन के कमेटी मेंबरों को भी प्रबंधन ने तैयार कर लिया है। बस आड़े रहा है यूनियन चुनाव। चुनाव बाद इस पर काम शुरू हो जाएगा। प्रबंधन ने क्रेन ऑपरेटरों को यह बात मानने के लिए दबाव बढ़ा दिया है।

टाटा स्टील कैंटीन सर्विसेज के कमेटी मेंबर मंगलेश्वर सिंह के एग्रिको स्थित आवास पर कैंटीन के सरप्लस कर्मचारियों की बैठक रविवार को हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंगलेश्वर सिंह ने कहा कि पीएन सिंह एक नंबर के झूठे व्यक्ति हैं। जब मीडिया में कैंटीन आउटसोर्स करने की खबर छपती थी, तो वे उनसे स्पष्टीकरण मांगते थे। पीएन सिंह हाउस में भी सबको गुमराह करते हुए कहते थे कि कैंटीन को कुछ नहीं होगा। उनके पास कोई प्रस्ताव नहीं है। मंगलेश्वर सिंह ने कहा कि जब कोई विभाग आउटसोर्स होता है, तो यूनियन के दो पदाधिकारी प्रबंधन को चिट्‌ठी लिखने का नाटक करते हैं। पीएन सिंह एंड टीम कर्मचारियों को बताए कि जिस तरह ट्यूब डिवीजन और कैंटीन बंद कराए गए हैं, उसी तरह क्रेन ऑपरेशन सेेंट्रलाइज एवं आरएमएमएस, ब्लास्ट फर्नेस और कितने विभाग आउटसोर्स करने के लिए उन्होंने हस्ताक्षर किए हैं। चुनाव में कर्मचारी उनकी पूरी टीम को उखाड़ फेकेंगे। बैठक में राम सुन्दर यादव, प्रदीप कुमार, रामभरोसे प्रसाद, मोहन कुमार, हीरा प्रसाद, आरपी शर्मा, भीम सिंह, सखा राम, शंकर प्रसाद, विजय आदि उपस्थित थे।

टाटा स्टील के एसएमडी के कमेटी मेंबर भगवान सिंह की अध्यक्षता में बिष्टुपुर स्थित उनके आवास पर तीसरे मोर्चा की बैठक हुई। बैठक में टाटा वर्कर्स यूनियन (टीडब्ल्यूयू) के चुनाव में तीसरे मोर्चे की गतिविधियों एवं विभिन्न विभागों में प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए रणनीति की समीक्षा की गई। वक्ताओं ने कहा कि अध्यक्ष और पूर्व अध्यक्ष द्वारा धन एवं बल का उपयोग कर आगामी चुनाव को प्रभावित करने एवं मजदूर हित पर इसके बुरे प्रभाव को रोकने में जिला प्रशासन और उच्च न्यायालय तक मोर्चे के सदस्यों की सक्रियता सराहनीय है। चुनाव प्रक्रिया संचालन में जिला प्रशासन को भरपूर सहयोग करने का निर्णय लिया गया। मोर्चा ने जल्द चुनाव घोषणा पत्र का मसौदा तैयार करने का निर्णय लिया। बैठक में सरोज कुमार सिंह, गोपीचंद राम, चमकलाल सिंह, जेके झा, राजकुमार सिंह, प्रवीण पांडे, सुभाष कुमार, एके श्रीवास्तव, राजीव कुमार, आरसी झा, सुनील सिंह, विनोद कुमार, आरके बेहरा, अजय कुमार समेत कई कमेटी मेंबर उपस्थित थे।

टाटा वर्कर्स यूनियन (टीडब्ल्यूयू) के चुनाव के बाद टाटा स्टील में सेंट्रल मेंटेनेंस ग्रुप (सीएमजी) पर फैसला होगा। प्रबंधन हर हाल में उत्पादन लागत कम करने पर आमादा है। पिछले आठ साल से सीएमजी का प्रकरण चल रहा है। तब से मेंटेनेंस के कर्मचारियों की समस्याओं पर प्रबंधन कोई बातचीत नहीं कर रहा है। चुनाव की घोषणा होने से पहले प्रबंधन ने सीएमजी के मुद्दे पर यूनियन से बातचीत शुरू की थी, लेकिन चुनाव की घोषणा होने के कारण प्रबंधन ने चुनाव तक मामले को टाल दिया है। अब चुनाव बाद नई कार्यकारिणी के समक्ष यह मामला विचार के लिए आएगा। प्रबंधन सीएमजी को लागू करना चाहता है। सीएमजी लागू होगा, तो मेंटेनेंस के कर्मचारियों को एक विभाग से दूसरे विभाग में मेंटेनेंस कार्य करने के लिए जाना पड़ेगा। वर्तमान में कर्मचारी केवल अपने विभाग में ही मेंटेनेंस का कार्य करते हैं।