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रेडलाइट एरिया में रहने वाली लड़कियों से भेदभाव : संध्या
जुदा राह बना लिखी अपनी तकदीर
इम्तियाज अली की फिल्म तमाशा में अदाकारी का जलवा बिखरेंगे पीयूष मिश्रा
डायवोर्स एडवोकेट बनना चाहती हैं रिंकी कुमारी
युवा हैं डिजिटल वर्ल्ड के असल सिकंदर : गोपाल खन्ना
जमशेदपुर | रांचीके ओरमांझी के हुटुप गांव की रहने वाली रिंकी कुमारी ने कहा कि वह बड़ी होकर डायवोर्स एडवोकेट (तलाक कराने वाली वकील) बनना चाहती है, ताकि गांव की महिलाओं को नारकीय जीवन से बाहर निकाल सके।
जेवियर लेबर रिलेशन्स इन्स्टीट्यूट (एक्सएलआरआई) में आयोजित टेडेक्स कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंची रिंकी ने दैनिक भास्कर को बताया कि उसका सपना है कि शराबी पतियों से रोज मार खाने वाली महिलाओं को तलाक दिला सकें।
बकौल रिंकी, जब देखती हूं कि मेरे गांव की औरतें रोज अपने शराबी पतियों से पिटी जाती हैं और वे कुछ नहीं कर पाती, तो गुस्सा आता है। अगर वह फुटबॉलर नहीं बन सकी, तो डायवोर्स एडवोकेट बन कर ऐसी महिलाओं को उनकी नारकीय जीवन से बाहर निकालेगी।
रिंकी बताती हैं, उनकी मां तेतरी देवी पढ़ी-लिखी नहीं हैं, लेकिन उन्हें स्कूल भेजना चाहती है। पिता ईंट भट्ठा पर काम करते है। पढ़े-लिखे नहीं थे, तो चाचा ने धोखे से अंगूठा लगवाकर उनकी सारी संपत्ति हड़प ली।
दिल की आवाज सुनी : ज्योत्स्ना
मेडिकलकी पढ़ाई छोड़ भरतनाट्यम को अपनी जिंदगी बनाने वाली ज्योत्स्ना जगन्नाथन ने कहा कि उन्होंने अपने दिल की आवाज सुनी। बकौल ज्योत्स्ना, मैंने अपने आपसे सवाल पूछा और फिर वही किया, जो मेरे दिल ने कहा। इंट्यूशन, इंटेंशन और इंस्पिरेशन के जरिए अपनी जिंदगी के सफर को बताया।
2020 तक 10 करोड़ लोगों तक पहुंच : सुनील
मल्टीलिंग्वलट्रांसलेशन प्लेटफॉर्म बनाकर दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाले सुनील खंडबहाले ने कहा कि उनका सपना ऐसा ट्रांसलेशन प्लेटफॉर्म बनाना है, जो हर भाषा के जानने-समझने वालों को दूसरी भाषा को जानने का मौका दे सके। सुनील ने बताया कि मराठी माध्यम से उनकी पढ़ाई हुई। उनमें भी अंग्रेजी को लेकर कॉम्पलेक्स था। इसी कॉम्पलेक्स ने उन्हें इस प्लेटफॉर्म को बनाने का आइडिया दिया। अब सपना है कि कोई किसी भी भाषा में बोले, मगर वह अनुवादित होकर लोगों को उनकी भाषा में मिले। हमारा लक्ष्य 2020 तक 10 करोड़ लोगों तक पहुंचने का है।
नए निर्देशकों की फिल्मों में नयापन
पीयूषने कहा कि नए निर्देशकों की जो पौध आई है, वह काफी टैलेंटेड है और वह कुछ अलग करना चाहती है। वह फार्मूला वाली फिल्मों में बंधे रहना नहीं चाहती। अनुराग कश्यप ने कमाल की फिल्में की हैं। यही कारण है कि उनके साथ काम किया है।
काफी मुश्किल होती है उनके जैसे निर्देशकों को
पीयूषने बताया कि उनके जैसे निर्देशकों को बॉलीवुड में काम करने में काफी मुश्किल होती है। बकौल मिश्रा, वे कला के साथ कोई समझौता नहीं कर सकते। कई बार काम पाने के लिए गिरना पड़ता है, जो उन्हें पसंद नहीं है। ऐसे में अच्छे काम के लिए कई बार इंतजार करना पड़ता है।
आप की जीत कमाल की
आप(आम आदमी पार्टी) की ऐतिहासिक जीत पर पीयूष मिश्रा ने कहा कि चमत्कार हो गया। कल तक जिस पार्टी को छोड़ सारे लोग भाग रहे थे, उसका यह प्रदर्शन हमें सोचने पर मजबूर करता है। इसका मतलब है कि अरविंद केजरीवाल को लोगों ने दिल से लगाया है। मुझे लगता है कि यह जीत देश में एक वैकल्पिक राजनीति का शुभारंभ है।
अपनेगीतों को गाकर जुदा राह बताई
पीयूषमिश्रा ने विभिन्न फिल्मों में गाए गीतों को गाकर अपनी जुदा राह बताई। ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है...गाकर अपने गीतों का सफर शुरू किया। इसके बाद एक बगल में चांद होगा, एक बगल में रोटियां, एक बगल में नींद होगी एक बगल में लोरियां...गाकर फिजा में संगीत का रंग घोला। इसके बाद राम प्रसाद बिस्मिल के गाए गीत सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है..को गाया। बाद में इसका एमटीवी संस्करण गाकर भावी प्रबंधकों को गुदगुदाया। विशाल भारद्वाज के संगीत में सजे गीत कहीं पर लड़की जाए लुढ़की, कहीं पर बच्चा फांके सूरती, कहीं पर अम्मा होते ठरकी... गाकर अपने जुदा गीत से सबको रूबरू कराया।
सिटी रिपोर्टर | जमशेदपुर
पीयूषमिश्रा, प्रकाश अय्यर, संध्या अय्यर, सुनील खंडबहाले, अनुज गोसालिया, फ्रैंज गैस्टलर, गोपाल खन्ना और ज्योत्स्ना जगन्नाथन। नाम और काम भले ही अलग-अलग हो, मगर इन जांबाजों ने जुदा राह अपनाकर एक अलग पहचान बनाई है। जेवियर लेबर रिलेशन्स इन्स्टीट्यूट (एक्सएलआरआई) जमशेदपुर में मंगलवार को आयोजित टेडेक्स में इन लोगों की सक्सेस स्टोरी से भावी प्रबंधक रूबरू हुए।
अभिनेता, गीतकार और लेखक पीयूष मिश्रा ने बताया कि वे करन जौहर की फिल्म शुद्धि के लिए स्क्रिप्ट लिख रहे हैं। उनकी एक अन्य फिल्म ट्रैफिक भी रही है। वे जमशेदपुर के फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली की फिल्म तमाशा (रणवीर कपूर और दीपिका पादुकोण अभिनीत) के साथ तेरे बिन लादेन के पार्ट-2 में अदाकारी का जलवा बिखेरने जा रहे हैं।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के साथ काम करने वाले भारतीय मूल के गोपाल खन्ना ने कहा कि आज हम डिजिटल वर्ल्ड में रह रहे हैं। दुनिया की 42 फीसदी आबादी 25 साल के नीचे आयुवर्ग की है। तकनीक ने सोच बदल दी है। तकनीक की बदौलत सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और व्यापारिक मूल्य तेजी से बदल रहे हैं। फ्लिप-कार्ट और अमेजन डॉटकॉम ने व्यापार का रूप बदल दिया है। ट्विटर और फेसबुक ने संचार के तरीके बदल डाले हैं। ऐसे में युवा इनोवेशन की बदौलत एक नया विश्व बना सकते है, क्योंकि डिजिटल वर्ल्ड के असल सिकंदर वे (युवा) ही हैं।
छोटीकहानियों के जरिए बनाई पहचान
टैरिबलटिनी टेल्स के संस्थापक अनुज गोसालिया ने बताया कि कैसे इंटरनेट पर उन्होंने इन छोटी कहानियों का संसार रचा। गुजराती परिवार से संबंध रखने वाले अनुज ने बताया कि आने वाले दिनों में वे पांच मिनट की टिनी टॉकिज भी शुरू करने वाले हैं, जिसमें छोटी फिल्में होंगी।
बेस्ट सेलर पुस्तकों के लेखक मोटिवेशनल स्पीकर प्रकाश अय्यर ने कहा कि लीडर हर आदमी के अंदर होता है। जरूरत है आपको अपने अंदर के लीडर को पहचानने की और उसे बाहर निकालने की। अय्यर ने टी बैग के जरिए गुड लीडर बनने के गुर बताए। उन्होंने कहा कि ट्रू लीडर चुनौतियों से भागता नहीं, उसका सामना करता है। लीडर टी बैग की तरह होता है, जो गर्म पानी में डूब कर महक बिखेरता है। उन्होंने कहा कि कुछ लीडर टी बैग को हमेशा अपनी हाथों में पकड़े रखना चाहते हैं, जो गुड लीडरशिप की निशानी नहीं है। अय्यर ने कहा कि बेहतर लीडर वह होता है जो टी बैग को बाहर निकाल, दूसरे को भी लीडर बनने का मौका देता है। बकौल अय्यर, जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर जब पीछे मुड़ कर देखूंगा तो मुझे इस बात का गर्व होगा कि मैंने यह काम किया। क्या पाया, इसका कोई मतलब नहीं है।
टेडेक्स में उपस्थित एक्सएलआरआई के विद्यार्थी और कार्यक्रम में शरीक होने वाले जांबाज (नीचे)
कौन हैं रिंकी कुमारी
रिंकीझारखंड की लड़कियों की फुटबॉल टीम की कैप्टन है। इस टीम ने पिछले साल स्पेन में आयोजित दोनोस्टी कप में कांस्य पदक जीता था। इस टूर्नामेंट में दुनिया भर की 30 देशों की 400 टीमों ने भाग लिया था। झारखंड की टीम में 18 लड़कियां थीं, जो गांव की गरीब लड़कियां हैं।
हवाईजहाज में उड़ान भरी, तो लगा सपने ने उड़ान भरी
रिंकीने दैनिक भास्कर को बताया कि स्पेन जाना किसी सपने-सा था। आज तक उन्होंने हवाई जहाज को नजदीक से नहीं था। लेकिन जब स्पेन के लिए हवाई जहाज ने उड़ान भरी, तो लगा कि सपने परवाज लेने लगे।
फ्रैंजको जाता है श्रेय
झारखंडमें युवा संस्था से जुड़े अमेरिकी नागरिक फ्रैंज गैस्टलर ने गरीब लड़कियों को अंग्रेजी सिखाना शुरू किया। लेकिन इस लैंग्वेज टीचर ने फुटबॉल ट्रेनर बन ऐसा प्रशिक्षण दिया कि स्पेन जाकर लड़कियों ने देश का नाम रौशन कर दिया।
कहतेहैं- यहकाम आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने इसे पूरा किया। कभी फुटबॉल नहीं खेला, मगर लड़कियों के जज्बे के आगे सबकुछ छोटा पड़ गया। बकौल फ्रैंज, उनका सपना है कि ज्यादा से ज्यादा कोच हों, जो झारखंड के गांव की लड़कियों को ट्रेनिंग दें।
वेश्या की बेटी वेश्या ही रहेगी, पढ़-लिखकर क्या बनेगी? मुंबई की रेडलाइट एरिया की लड़कियों के लिए काम करने वाली 18 साल की संध्या नायर का यह गुस्सा है। टेडेक्स में शिरकत करने पहुंची संध्या ने कहा कि आज भी रेडलाइट एरिया की लड़कियों के प्रति लोगों की मानसिकता में बदलाव नहीं आया है। उनके साथ भेदभाव बरता जाता है। लोग सोचते हैं कि वे किसी के साथ हम-बिस्तर हो सकती हैं। अपनी निजी जिंदगी के अनुभवों के आधार पर बोलती संध्या भावुक हो जाती हैं और कहती हैं- हम भी इंसान हैं। हमारी भी हसरतें हैं। हमारे भी सपने हैं। हम भी पढ़ना चाहते हैं, कुछ करना चाहते हैं। लेकिन घर से लेकर बाहर, हर जगह उनके साथ भेदभाव बरता जाता है। उनके साथ खुलेआम छेड़खानी होती है। लेकिन कोई आवाज नहीं उठाता। क्रांति संस्था के साथ जुड़कर ऐसी लड़कियों के लिए काम करने वाली संध्या ने कहा कि वह बड़ी होकर क्रिमिनल साइकैट्रिस्ट बनना चाहती है। वह लोगों के मनोविज्ञान को समझना चाहती है। संध्या ने दैनिक भास्कर से कहा कि उन लोगों को सहानुभूति नहीं चाहिए। उन्हें विश्वास है कि इन अंधियारे में जिंदगी जीने वाली लड़कियों के लिए एक दिन सवेरा जरूर होगा।