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हड़ताल के साथ पड़ी थी यूनियन की बुनियाद

6 वर्ष पहले
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यूनियन महामंत्री को बयानबाजी पड़ी महंगी, जिला प्रशासन ने जारी किया नोटिस

महंगा होगा यूनियन चुनाव लड़ना

कर्मचारियों के बीच चर्चा

कैसे होगा चुनाव, ग्लोबल या निर्वाचन क्षेत्र बनाकर

नामांकन के लिए जाना पड़ सकता है अंचल कार्यालय

निर्वाचन क्षेत्र के लिए ज्ञापन

प्रशासन को सौंपी कर्मचारियों की सूची

जमशेदपुर | टाटावर्कर्स यूनियन चुनाव में पीएन सिंह और रघुनाथ पांडे जहां अध्यक्ष पद के लिए ताल ठोक रहे हैं, वहीं तीसरा मोर्चा भी अध्यक्ष पद के लिए प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। तीसरा मोर्चा का नेतृत्व एसएमडी के कमेटी मेंबर भगवान सिंह कर रहे हैं। भगवान सिंह के समर्थक उन्हें अध्यक्ष पद के लिए बेहतर प्रत्याशी मानते हैं। वे अनुभवी हैं और वीजी गोपाल से लेकर पीएन सिंह तक के अध्यक्षीय कार्यकाल में सक्रिय रहे हैं। इस संबंध में पूछने पर भगवान सिंह ने कहा कि वे यूनियन में लंबे अरसे से सक्रिय हैं। कई बेहतर काम किया है। पिछले चुनाव में रघुनाथ पांडे के खिलाफ सबसे पहले उन्होंने ही पीएन सिंह को खड़ा किया। लेकिन अब वे दोनों मजदूर नेताओं से अलग तीसरा मोर्चा बनाकर मजदूरों के हित के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समर्थकों से बातचीत कर जल्द ही निर्णय लेंगे और तीसरा मोर्चा अध्यक्ष पद पर उम्मीदवार की घोषणा करेगा।

जमशेदपुर | टाटावर्कर्स यूनियन (टीडब्ल्यूयू) के महासचिव बीके डिंडा को बयानबाजी महंगी पड़ गई है। प्रशासन द्वारा चुनाव कराने के लिए अपनाई जा रही प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करते हुए डिंडा ने मंगलवार को बयान जारी किया था। प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए मंगलवार की शाम कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यूनियन चुनाव के निर्वाची पदाधिकारी सह एडीसी सुनील कुमार ने नोटिस जारी किया है। इसमें कहा गया है कि बयान चुनाव की प्रक्रिया की निष्पक्षता स्वतंत्रता को बाधित करने वाला प्रतीत होता है। प्रशासन की ओर से चुनाव की घोषणा करते समय इस बात का ध्यान रखा गया है कि निर्वाचन क्षेत्र का निर्धारण किए जाने के बाद उसे सार्वजनिक किया जाएगा। इसके बाद कर्मचारी अपना दावा और आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। प्रशासन इस पर विचार करने के बाद ही कोई फैसला करेगा। नोटिस में कहा गया है कि हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में प्रशासन ने चुनाव की प्रक्रिया शुरू की है। ऐसी स्थिति में बयान कोर्ट के आदेश के अनुपालन में क्यों नहीं हस्तक्षेप माना जाए। कोर्ट के आदेश में इस बात का उल्लेख नहीं है कि आपकी भूमिका क्या होगी।

जमशेदपुर | टाटावर्कर्स यूनियन (टीडब्ल्यूयू) का चुनाव लड़ना महंगा होगा। कमेटी मेंबर का चुनाव लड़ने के लिए अब तक मात्र 100 रुपए में नामांकन पत्र मिलता था। चुनाव के लिए यही सुरक्षित जमा राशि होती थी। डीसी डॉ अमिताभ कौशल ने इसमें संशोधन करने का फैसला लिया है। कमेटी मेंबर का चुनाव लड़ने के लिए अब अधिक सुरक्षित जमा राशि देनी होगी। यूनियन के पदाधिकारी का चुनाव लड़ने के लिए और अधिक राशि देनी होगी। सुरक्षित जमा राशि का नए सिरे से निर्धारण के लिए डीसी ने विधि शाखा के प्रभारी पदाधिकारी अनिल कुमार राय को निर्देश दिया है। डीसी ने प्रभारी पदाधिकारी से कहा है कि टाटा स्टील के प्रति कर्मचारी आय की सूचना ली जाए। उसका औसत निकाला जाए। उसका अध्ययन करने के बाद सुरक्षित जमा राशि तय की जाए। नामांकन पत्र लेने के लिए सुरक्षित जमा राशि देनी होगी। नामांकन पत्र वापस लेने की स्थिति में यह राशि मिल जाएगी। चुनाव में जीत हो अथवा हार, यह राशि वापस नहीं मिलेगी। यह मायने नहीं रखेगा कि कितने मत प्राप्त हुए हैं। चुनाव सम्पन्न होने के बाद राशि यूनियन के कोष में जमा करा दी जाएगी।

टाटा वर्कर्स यूनियन के नेताओं ने उपायुक्त को ज्ञापन दिया

ये हैं तीसरा मोर्चा में

भगवानसिंह, सरोज सिंह, प्रवीण पांडे, गोपीचंद राम, जे हसन, आरआर सिंह, आरके बेहरा, एके श्रीवास्तव, सुभाष, अजय कुमार, जेके झा, आरके सिंह, सुनील कुमार आदि।

^इसबार पीएन सिंह और रघुनाथ पांडे के खिलाफ तीसरा मोर्चा का गठन किया गया है, जो चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए अपना प्रत्याशी देगा। इसकी आधिकारिक घोषणा जल्द ही की जाएगी। को-ऑप्शन किसी भी स्थिति में मजदूर हित में नहीं होगा।\\\' भगवानसिंह, कमेटी मेंबर, एसएमडी, टीडब्ल्यूयू

आज दोपहर 12 बजे अिधकारी

करेंगे कंपनी का दौरा

चुनावके लिए निर्वाचन क्षेत्र का निर्धारण करने के लिए गठित की गई टीम के सदस्य बुधवार को कंपनी परिसर का निरीक्षण करेंगे। डीसी डॉ अमिताभ कौशल ने क्षेत्र के निर्धारण के लिए एक कमेटी का गठन किया है। कमेटी में एडीसी सुनील कुमार, जिला आपूर्ति पदाधिकारी दिलीप कुमार तिवारी, आईटीडीए के निदेशक परमेश्वर भगत, एसडीओ प्रेमरंजन डीएलसी एसएस पाठक शामिल हैं। कमेटी में शामिल अधिकारी कल दोपहर 12 बजे कंपनी का दौरा करेंगे। इस दौरान वे कर्मचारी से बातचीत भी करेंगे। अधिकारी निर्वाचन क्षेत्र के निर्धारण के साथ कंपनी परिसर में चुनाव कराने के लिए स्थान का भी मुआयना करेंगे। प्रशासन इस बार चुनाव कंपनी परिसर के अंदर कराना चाहता है। प्रशासन को इस बात की पक्की जानकारी है कि पिछले चुनाव में शहर के आपराधिक गुट ने चुनाव को प्रभावित किया था। पिछली बार चुनाव जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हुआ था। उस दौरान शहर के बिल्डर एक क्षेत्रीय दल के आपराधिक चरित्र के नेता ने चुनाव जीतने वाले कमेटी मेंबर पर दबाव बनाकर चुनाव कार्य प्रभावित किया था।

चुनाव के लिए जमशेदपुर अंचल कार्यालय में नामांकन हो सकता है। डीसी ने मंगलवार को अंचल कार्यालय में जनता दरबार की समाप्ति के बाद परिसर में नामांकन पत्र के वितरण एवं जमा लेने की संभावना पर गौर किया। अंचल कार्यालय में बड़ा भवन खाली मिला। चुनाव कार्य में लगाए गए अधिकारी एक बार फिर अंचल कार्यालय का मुआयना करेंगे। इसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। पिछले चार चुनाव में जिला प्रशासन के अधिकारी और कुछ कर्मचारी यूनियन कार्यालय आते थे। कमेटी मेंबर का चुनाव लड़ने के इच्छुक कर्मचारी यूनियन कार्यालय में नामांकन कार्य करते थे। यूनियन कार्यालय में कर्मचारियों का यूं ही आना-जाना लगा रहता है। इस कारण नामांकन के लिए उन्हें कोई मशक्कत नहीं करनी पड़ती थी। इस बार प्रशासन ने चुनाव में यूनियन अथवा टाटा स्टील की परिसंपत्ति का न्यूनतम उपयोग करने का फैसला लिया है।

ऐसे में कुछ बुद्धिजीवियों ने कोलकाता जाकर समाजसेवी और कोलकाता उच्च न्यायालय के विख्यात बैरिस्टर सुरेन्द्रनाथ हलधर से जमशेदपुर के मजदूरों का नेतृत्व संभालने का अनुरोध किया। मजदूरों की मांग को देखते हुए हलधर 26 फरवरी 1920 को जमशेदपुर आए और हड़ताली मजदूरों का नेतृत्व किया। टाटा प्रबंधन और हलधर साहब के बीच एक सप्ताह तक कई दौर की बातचीत हुई। जब कोई हाल नहीं निकला, तो उन्होंने व्योमकेश चक्रवर्ती की सलाह पर पांच मार्च 1920 को जमशेदपुर लेबर एसोसिएशन के नाम से एक मजदूर संगठन स्थापित की। हलधर साहब लेबर एसोसिएशन के पहले अध्यक्ष चुने गए। जेसी घोष मानद सचिव और वीजे साठे कोषाध्यक्ष चुने गए।

मजदूरों की मांग पत्र पर विचार नहीं होने पर हड़ताल

जनवरी1920 में टाटा कंपनी में कार्यरत कुछ तेज तर्रार मजदूरों ने प्रबंधन को एक मांग पत्र सौंपा। एक माह बाद भी जब प्रबंधन ने उसपर कोई विचार नहीं किया, तो फरवरी के प्रथम सप्ताह में मजदूरों ने एक सभा के दौरान सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि यदि टाटा प्रबंधन एक सप्ताह के भीतर मजदूरों के मांगपत्र पर निर्णय नहीं लेता है, तो हड़ताल की जाएगी। प्रबंधन ने जब मांगपत्र पर कोई विचार नहीं किया, तो विवश होकर मजदूरों ने हड़ताल की।

जमशेदपुर | टाटावर्कर्स यूनियन (टीडब्ल्यूयू) का इतिहास 1920 से आरंभ हुआ, जब भारत गुलाम था। प्रथम विश्व युद्ध के बाद टाटा स्टील में कार्यरत मजदूरों में जागृति की भावना पैदा होने लगी। 1916 में कंपनी को अनुमान से अधिक लाभ हुआ था, किन्तु निश्चित क्षमता से अधिक उत्पादन होने के बावजूद श्रमिकों की मजदूरी में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की गई। युद्ध के बाद दैनिक उपयोग की वस्तुओं का मूल्य बढ़ने के कारण कंपनी के श्रमिकों का आर्थिक संतुलन बिगड़ने लगा। इससे मजदूरों में असंतोष की भावना पैदा हाेने लगी।

सिटी रिपोर्टर | जमशेदपुर

टाटास्टील प्रबंधन ने अपने कर्मचारियों की सूची मंगलवार शाम जिला प्रशासन को सौंप दी। टाटा वर्कर्स यूनियन चुनाव के निर्वाची पदाधिकारी सुनील कुमार ने मंगलवार की सुबह टाटा स्टील के एचआरएम चीफ बीबी दास को नोटिस कर डिपार्टमेंट सेक्शन वार कर्मचारियों की सूची देने का आदेश दिया था।

दोतरह की सूची सौंपी

टाटास्टील प्रबंधन की ओर से दो तरह की सूची प्रशासन को सौंपी गई है। एक सूची एमओआर (मेन ऑफ रोल) की है, जबकि दूसरी टाटा वर्कर्स यूनियन के सदस्यों की है। एमओआर की संख्या करीब 15500 है। कंपनी प्रबंधन की ओर से दी गई सूची में करीब छह सौ ऐसे कर्मचारी है जो टाटा वर्कर्स यूनियन के सदस्य नहीं हैं।

15 मार्च 1920 को घुड़सवार पुलिस द्वारा हड़ताली कर्मचारियों के जुलूस पर गोली चालन की गई, जिसमें पांच मजदूर मारे गए और 21 घायल हो गए। 19 मार्च को दोनों पक्षों में समझौता हुआ और हड़ताल समाप्त हुई। हलधर साहब ने लेबर एसोसिएशन की स्थापना कर लगातार चार वर्षों तक मजदूरों का नेतृत्व किया।

अध्यक्ष कार्यकाल

स्व.एसएन हलधर : 1920 से 1922

स्व. सीएफ एन्ड्रूज : 1922 से 1928

स्व. सुभाषचंद्र बोस : 1928 से 1936

स्व. अब्दुल बारी सिद्दिकी : 1936 से 1947

स्व. माइकल जॉन : 1947 से 1977

स्व. वीजी गोपाल : 1977 से 1993

स्व. एसके बेंजामिन : 1993 से 2002

आरबीबी सिंह : 2002 से 2005

रघुनाथ पांडे : 2006 से 2012

पीएन सिंह : 2012 से अब तक