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सिख समाज ने आयोग के समक्ष रखा पक्ष

7 वर्ष पहले
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शहरमें करीब सात दशक से रह रहे सिख रामगढ़िया समाज का कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी में नहीं है। इस बात का खुलासा स्थानीय परिसदन में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सुनवाई के दौरान हुआ।

जमशेदपुर और धनबाद में रहने वाले सिख समाज के लोहार (रामगढ़िया) जाति, कहार छिम्बा( दर्जी) जाति के लोगों ने आयोग को ज्ञापन सौंपकर झारखंड में पिछड़ी जाति में शामिल करने की मांग की थी। इन जातियों के प्रतिनिधियों का तर्क है कि पंजाब और देश के कई दूसरे राज्यों में इन जातियों को पिछड़ी जाति का दर्जा हासिल है। इन लोगों की मांग के आलोक में बीते दो सितंबर को आयोग के रांची स्थित कार्यालय में सुनवाई की गई थी। सुनवाई के बाद आयोग की टीम स्थल निरीक्षण के लिए चार दिनों के दौरे पर है। इसी क्रम में आयोग के अध्यक्ष जस्टिस लोकनाथ प्रसाद सदस्य केशव महतो कमलेश सोमवार को शहर पहुंचे।

बैठक में जिला कल्याण पदाधिकारी आशीष कुमार सिन्हा, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी अश्विनी कुमार मंडल, जमशेदपुर प्रखंड विकास पदाधिकारी अनिता केरकेट्टा, रंजीत सिंह, सेवा सिंह, जसवीर सिंह, सोहन सिंह, महेंद्र सिंह, दलवीर सिंह, मनोहर सिंह, मोहन सिंह, अमरजीत सिंह, अवतार सिंह, अजीत सिंह आदि।

आज टुइलाडुंगरी गुरुद्वारा में पक्ष सुनेगी टीम

बैठकके बाद केशव महतो कमलेश ने बताया कि जमशेदपुर और धनबाद के उन इलाकों का दौरा किया जा रहा है, जहां इन जाति के लोगों की जनसंख्या ज्यादा है। इसी क्रम में मंगलवार को आयोग की टीम टुइलाडुंगरी गुरुद्वारा में इन तीनों जातियों का पक्ष सुनेगी। इसके धनबाद में स्थल निरीक्षण किया जाएगा।

बिहारके कुड़मी को झारखंड में ओबीसी का दर्जा

कमलेशने कहा कि बिहार के कुड़मी जाति को आयोग की पहल पर झारखंड में पिछड़ी जाति में शामिल कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि जाति प्रमाण पत्र निर्गत करना राज्य सरकार का काम है। जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए क्या मापदंड तय किया जाता है, यह राज्य सरकार के विवेक पर निर्भर करता है। अगर दूसरे राज्य का कोई पिछड़ी जाति झारखंड में कारोबार करने के लिए आया है, तो उसे इस राज्य में पिछड़ी जाति का दर्जा तत्काल नहीं मिल सकता। वर्षों तक यहां रहने वाले ही पिछड़ी जाति में शामिल होने के लिए दावा कर सकते हैं।

परिसदन में आयोग की टीम के साथ िसख समाज के प्रतिनिधि।