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अज्ञानता से कामना की उत्पत्ति : भूमानंद

6 वर्ष पहले
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कामनाओंको पालने से मन संकीर्ण हो जाता है। काम इच्छा से नहीं, बल्कि जरूरत से होता है। समाज को जिस चीज की जरूरत होगी, उसका उत्पादन करने के लिए काम होगा। ऐसी कुशलता प्राप्त करें जिसकी जरूरत समाज को हो। यह बातें स्वामी भूमानंद तीर्थ ने कहीं।

भूमानंद तीर्थ विकास केंद्र ब्रह्म विद्या सेंटर (सोनारी) में चल रहे चूड़ामणि पर आधारित कक्षा के तीसरे दिन गुरुवार को कर्म के महत्व पर प्रकाश डाल रहे थे। उन्होंने कहा कि मन की इच्छा की पूर्ति के लिए लोग जो कष्ट उठाते हैं वह अज्ञानता से ही उत्पन्न होता है। मुक्ति पाने के लिए इच्छाओं को नियंत्रण में रखें।

ब्रह्म विद्या सेंटर, सोनारी में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित लोग।

केरल से आईं स्वामीजी की शिष्या मां गुरु प्रिया ने सांध्यकालीन सत्र में कहा कि भक्ति से ही मन के अंदर का अहंकार दूर होता है और संसार से वैराग्य बढ़ता है। आप अभ्यास से मन को शुद्ध करेंगे, तो भगवान का दर्शन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सच्चे संतों का दर्शन करें। मौके पर मुख्य रूप से डॉ. एनके दास, आरएस तिवारी विजय कुमार मेहता आदि उपस्थित थे।