पार्क के लिए हटा दीं 8 दुकानें
1.रामदास राय (कोल्ड ड्रिंक्स दुकान) 1.00 लाख रुपए
2. जीतेंद्र प्रसाद (साइकिल दुकान) 1.50 लाख रुपए
3. बीरेंद्र ठाकुर (सैलून) 0.70 लाख रुपए
4. तापस कुमार साव (वेरायटी स्टोर) 1.20 लाख रुपए
5. सुधीर कुमार साह (पान दुकान) 0.30 लाख रुपए
6. ललित राय (जेनरल स्टोर) 1.50 लाख रुपए
7. नथुनी मंडल (वेरायटी स्टोर) 1.50 लाख रुपए
8. प्रदीप कुमार (सैलून) 0.30 लाख रुपए
अचानक की गई कार्रवाई, एक पल में सब बर्बाद हो गया
^मैं20 साल से वेरायटी स्टोर चला रहा था। लेकिन एक पल में ही सब बर्बाद हो गया। दुकान हटाने से पहले नोटिस दिया जाना चाहिए। अचानक कार्रवाई की गई।^ ललितराय, दुकानदार
बिना नोटिस दिए तोड़ दी गई दुकान
^पिछले30 वर्ष से साइकिल दुकान चला रहा था। दुकान से ही परिवार का भरण-पोषण होता था। बिना नोटिस के जुस्को ने दुकान तोड़ दी। दुकान हटाने का मौका भी नहीं दिया गया।^ सीतारामप्रसाद, दुकानदार
बहू के नाम पर आवंटित है दुकान
^मैं20 वर्ष से दुकान कर रहा हूं। टाटा स्टील की ओर से दुकान बहू के नाम पर आवंटित है। लेकिन, बिना नोटिस दिए दुकान तोड़ दी गई।^ रामदासराय, दुकानदार
प्रेमनगर मैदान के किनारे बनी दुकानों को हटाता पोकलेन।
क्राइम रिपोर्टर | जमशेदपुर
टेल्कोथाना अंतर्गत प्रेमनगर पार्क के पास जुस्को द्वारा आठ दुकानों को हटा दिया गया। जुस्को की टीम गुरुवार सुबह नौ बजे प्रेमनगर पार्क के पास पहुंची। टेल्को थाना की पुलिस भी साथ थी। पोकलेन की मदद से दुकानों को हटाए जाने का काम शुरू हुआ, जो दोपहर करीब 12.30 बजे तक चला। जुस्को द्वारा दुकान हटाए जाने से दुकानदार काफी आक्रोशित थे। हालांकि, किसी दुकानदार ने विरोध नहीं किया।
दुकानदारों की मानें, तो जुस्को के पदाधिकारी गुरुवार की सुबह अचानक दल-बल के साथ दुकान हटाने पहुंचे। उन्होंने अविलंब दुकान खाली करने अन्यथा दुकान तोडऩे की चेतावनी दी। अचानक हुई कार्रवाई से दुकानदारों को काफी नुकसान हुआ है।
दुकानका देते हैं किराया फिर भी तोड़ दिया
दुकानदाररामदास राय के मुताबिक, वे जुस्को को दुकान का किराया भी देते हैं। जुस्को से उनकी बहू किरण देवी के नाम पर दुकान आवंटित किया था। फिर भी बिना नोटिस दिए जुस्को ने दुकानें तोड़ दीं। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन और जुस्को द्वारा प्रेमनगर मैदान को पार्क के रूप में रूपांतरित किया जा रहा है। पार्क के कारण उनलोगों को उजाड़ दिया गया। दुकान से ही परिवार का भरण पोषण होता था। अब वे कहां जाएं।