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शांति के लिए आध्यात्म जरूरी : सरयू

5 वर्ष पहले
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लोयोलास्कूल का फैजी ऑडिटोरियम रविवार की शाम भजनों से गूंज उठा। मौका था आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से आयोजित संगीत के कार्यक्रम सुमेरा संध्या का। इसमें प्रख्यात गायक गौतम दबीर ने भजन प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने भजनों और गायन के माध्यम से जीवन जीने की कला भी सिखायी। आर्ट ऑफ लिविंग के 35 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में 11 से 13 मार्च तक विश्व संस्कृति उत्सव का आयोजन किया जा रहा है।

इसके तहत इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत गौतम दबीर ने शिव कैलाश के वासी, शंकर संकट हरना...से की। इसके बाद उन्होंने हर पल को खुशी पूर्वक जीने का संदेश देते हुए जिंदगी में जो करना चाहता है कर गुजर...गीत प्रस्तुत किया। इसके अलावा उन्होंने शिव शंभू, नंद-नंद गोपाल, गुरु ओम गुरु, जय दुर्गा जागो-जागो मां... भजन से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। भजन संध्या के माध्यम से उन्होंने आह्वान किया कि वे आर्ट ऑफ लिविंग के विश्व संस्कृति उत्सव में भाग लें और सकारात्मक उर्जा का समाज में संचार करें। गौतम दबीर के साथ सहयोगी कलाकारों के रूप में निशांत, तबला पर बप्पा, बांसुरी अशोक दास, की-बोर्ड पर स्वप्न तिवारी मौजूद थे।

लोयोला स्कूल के फैजी ऑडिटोरियम में कार्यक्रम प्रस्तुत करते कलाकार उपस्थित लोग।

आर्ट ऑफ लिविंग के सुमेरा संध्या का उदघाटन खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने किया। उन्होंने कहा कि समाज में शांति के लिए आध्यात्म जरूरी है। भारत की महान संस्कृति हमेशा से विश्व को प्रेरणा देती है। इस अवसर पर नवीन चौरसिया, केशव पटेल, रीता मिश्रा, अर्चना गौतम, निशा झा, गौतम घोष, महावीर, रविप्रकाश, विकास शर्मा, विनोद, अनुज, मृत्युंजय, राकेश, समीर, संजीव, निशा शर्मा, गायत्री आदि उपस्थित थीं।

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