एक-दूसरे के सुख दुख में काम आएं
धार्मिकसामाजिक अंतर किए बिना इंसानियत के नाते इंसान एक-दूसरे के सुख-दु:ख में काम आए और जरूरतों को पूरा करे। यह अल्लाह और रसूल की हम सबों के लिए हिदायत है। पैगंबर हजरत मोहम्म्द (सअ) ने फरमाया है कि किसी काे खुशी देने के लिए कोई मदद करता है, तो उसने मुझे खुश कर दिया और जिसने मुझे खुश कर दिया उसने अल्लाह को खुश कर दिया और अल्लाह को खुश करने वाला सीधे जन्नत में जाएगा। यह बातें मौलाना मुफ्ती अमीरुल हसन ने धातकीडीह बड़ी मस्जिद में जुमा की नमाज से पूर्व अपनी तकरीर में कहीं।
उन्होंने कहा कि यह एक छोटा-सा अमल है लेकिन इसकी जन्नत पालने जैसी इतनी बड़ी बशारत (घोषणा) है। हमारे नबी ने फरमाया कि इंसानियत के नाते एक-दूसरे पर तरस खाओ, उनकी मदद करो। अल्लाह के रसूल ने फरमाया कि इंसान कि मदद करो।
मुफ्ती ने कहा कि इस कथन में किसी जात-धर्म की बात नहीं है। चाहे हिंदू हो या मुसलमान या सिख, हर इंसान की मदद की जानी चाहिए, यह इस्लाम की तालीमात है। इस्लाम एक इंसान को इंसान के तौर पर देखना चाहता है। मुफ्ती अमीरुल हसन ने कहा कि विधवा, तलाकशुदा और अविवाहित लड़कियों महिलाओं की शादी कराने के लिए प्रयास करना पूरे समाज की जिम्मेदारी है। अगर हमारे गैर मुस्लिम भाइयों के घरों में इस तरह का मामला हो, तो उसमें बढ़-चढ़कर सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भूखे को खाना खिलाना, प्यासे को पानी पिलाना और मरीज की अयादत करना (हालचाल पूछना) नेक अमल है, जिससे अल्लाह खुश होता है।