कितनी गहरी उदासी है, दिन गुजरा है, रात बाकी है
सिंहभूमजिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन की ओर से रविवार शाम को तुलसी भवन बिष्टपुर में काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी दिवंगत साहित्यकार अमृतलाल नागर, भवानी प्रसाद मिश्र और वृंदालाल वर्मा की जयंती को समर्पित थी। साहित्यकारों ने इनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न कविताओं का पाठ किया।
अरुणेन्दु ने मां शारदा को आह्वान किया-हंस वाहिनी, बुद्धि दाहिनी मां सरस्वती वर दे। शैैल ने पढ़ा-लिबास जिस्म का मलमल बना के छोड़ गया। यमुना तिवारी ने वीर गाथा गाया-वीर पूर्वजों की गाथाएं, बच्चों को कोर्स में पढ़वाएं। वीणा भारती ने पाठ किया-कोई सपनों में आता रहा रातभर.. जबकि वरुण प्रभात ने कविता सुनाई-कितनी गहरी उदासी है, दिन गुजरा है, रात बाकी है..।
जेएनयूकी घटना को बताया शर्मनाक
साहित्यकारोंने जेएनयू की घटना को शर्मनाक बताया। हरिवल्लभ सिहं आरसी ने कहा कि जो लोग देश में रहकर देश की बुराई करते हैं, वह देशद्रोह के समान है। डॉ. बच्चन पाठक सलिल, नर्मदेश्वर पांडेय, श्रीराम पांडेय भार्गव, पंचानन सिंह, अरुण कुमार अरुणेन्दु, कैलाशनाथ शर्मा गाजीपुरी और शैलेन्द्र पांडेय ने इस घटना की निंदा की। मौके पर अरुण अलबेला, प्रकाश चन्द्र, राजदेव सिन्हा, कन्हैयालाल अग्रवाल, विजय नारायण सिंह, भंजदेव सिंह, संजय पाठक, इन्द्र भूषण ओझा, बसंत पंचित, छाया प्रसाद, उमेश चतुर्वेदी, अरविंद विद्रोही, उदय प्रताप हयात, कृष्णानंद पांडेय, कैलाशनाथ शर्मा, उमेश चतुर्वेदी, वीणा पांडेय, शैलेन्द्र कुमार पांडेय, नीलिमा पांडेय, अरुणा भूषण, विजय भूषण, श्यामलाल पांडेय, परमानंद कबीर, सोमनाथ कुशवाहा आदि उपस्थित थे।
सिटी रिपोर्टर | जमशेदपुर
सिंहभूमजिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन की ओर से रविवार शाम को तुलसी भवन बिष्टपुर में काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी दिवंगत साहित्यकार अमृतलाल नागर, भवानी प्रसाद मिश्र और वृंदालाल वर्मा की जयंती को समर्पित थी। साहित्यकारों ने इनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न कविताओं का पाठ किया।
अरुणेन्दु ने मां शारदा को आह्वान किया-हंस वाहिनी, बुद्धि दाहिनी मां सरस्वती वर दे। शैैल ने पढ़ा-लिबास जिस्म का मलमल बना के छोड़ गया। यमुना तिवारी ने वीर गाथा गाया-वीर पूर्वजों की गाथाएं, बच्चों को कोर्स में पढ़वाएं। वीणा भारती ने पाठ किया-कोई सपनों में आता रहा रातभर.. जबकि वरुण प्रभात ने कविता सुनाई-कितनी गहरी उदासी है, दिन गुजरा है, रात बाकी है..।
जेएनयूकी घटना को बताया शर्मनाक
साहित्यकारोंने जेएनयू की घटना को शर्मनाक बताया। हरिवल्लभ सिहं आरसी ने कहा कि जो लोग देश में रहकर देश की बुराई करते हैं, वह देशद्रोह के समान है। डॉ. बच्चन पाठक सलिल, नर्मदेश्वर पांडेय, श्रीराम पांडेय भार्गव, पंचानन सिंह, अरुण कुमार अरुणेन्दु, कैलाशनाथ शर्मा गाजीपुरी और शैलेन्द्र पांडेय ने इस घटना की निंदा की। मौके पर अरुण अलबेला, प्रकाश चन्द्र, राजदेव सिन्हा, कन्हैयालाल अग्रवाल, विजय नारायण सिंह, भंजदेव सिंह, संजय पाठक, इन्द्र भूषण ओझा, बसंत पंचित, छाया प्रसाद, उमेश चतुर्वेदी, अरविंद विद्रोही, उदय प्रताप हयात, कृष्णानंद पांडेय, कैलाशनाथ शर्मा, उमेश चतुर्वेदी, वीणा पांडेय, शैलेन्द्र कुमार पांडेय, नीलिमा पांडेय, अरुणा भूषण, विजय भूषण, श्यामलाल पांडेय, परमानंद कबीर, सोमनाथ कुशवाहा आदि उपस्थित थे।