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आदित्यपुर के छोटे उद्योगों को हो रही परेशानी

5 वर्ष पहले
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लगातारबाजार की मंदी और वर्क ऑर्डर नहीं मिलने से आदित्यपुर की कई औद्योगिक इकाइयां बंदी की कगार पर पहुंच गईं हैं। इस स्थिति से उद्यमियों और कामगारों में ऊहापोह है। उद्यमी यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि वे क्या करें। मंदी की मार से निकलने के लिए वे भरसक अपने स्तर से प्रयास भी कर रहे हैं, लेकिन इसमें वे सफल नहीं हो पा रहे हैं। इस बाबत कुछ स्थानीय उद्यमियों ने स्पष्ट तौर पर कहा कि यहां की औद्योगिक इकाइयों की बड़ी कंपनियां उपेक्षा कर रही हैं। इसी कारण यह संकट आया है। कई इकाइयां बंदी की कगार पर हैं। अगर समय रहते इस ओर सरकार ने ध्यान नहीं दिया, तो कई छोटे उद्यमी बर्बाद हो जाएंगे। हजारों मजदूर भी बेरोजगार हो जाएंगे।

^मंदी के कारण कुछ इकाइयां पहले ही बंद हो चुकी हैं। अगर यही हाल रहा, तो और कई कंपनियां बंद हो जाएंगी। इससे विकराल समस्या उत्पन्न होगी। सरकार इस समस्या को गंभीरता से ले और बड़ी कंपनियों से छोटी इकाइयों को वर्क ऑर्डर दिलाने की पहल करे।^ आलोकचौधरी, उद्यमी

^इनकंपनियों को बचाने के लिए सरकार को प्रोसक्यूरमेंट पॉलिसी लागू करनी होगी। इस पॉलिसी के लागू हो जाने के बाद बड़ी कंपनियों को हर हाल में छोटी इकाइयों को कुल खरीदारी या ऑर्डर का 20 प्रतिशत हिस्सा देना ही होगा।^ रूपेशकटियार, अध्यक्ष उद्योग भारती, सरायकेला-खरसावां

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