शहर में 5 ब्रिज बनने से विकास को लगेंगे पंख, दूर होगी जमीन की कमी
शहरके यातायात की कनेक्टिविटी बढ़ाने का काम तेजी से जारी है। इसके लिए सरकार खरकई और सुवर्णरेखा नदी पर कुल मिलाकर 5 ब्रिज (पुल) बनाएगी। इनमें चार पुल का निर्माण कार्य जारी है, जबकि एक ब्रिज के निर्माण को सरकार की स्वीकृति मिल गई है। इसका निर्माण कार्य शुरू होना शेष है।
ये पांच ब्रिज जब बनकर तैयार हो जाएंंगे, उसके बाद से शहर के विस्तार के लिए कम से कम 50 हजार एकड़ जमीन उपलब्ध हो जाएगी। उन क्षेत्रों में रहने वाले किसानों की जमीन की कीमत आज जहां कौड़ियों के भाव हैं, अचानक बढ़ जाएगी। किसानों की भी शहर से कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी और वे आसानी से अपने उत्पाद शहर के बाजार में पहुंचा सकेंगे।
बनता नगर ब्रिज : ग्रामीणविकास विभाग द्वारा आदित्यपुर में खरकई नदी पर यह ब्रिज बनाया जा रहा है। इस ब्रिज के बन जाने से चाईबासा की दूरी लगभग 20 किमी घट जाएगी। यह पुल राजनगर को जोड़ेगा। इस ब्रिज के बन जाने से भी शहर के विस्तार के लिए एक नया रास्ता खुल जायेगा। औद्योगिक विस्तार के लिए हजारों एकड़ जमीन उपलब्ध हो जाएगी।
आसंगी ब्रिज : आदित्यपुरऔद्योगिक क्षेत्र में आसंगी में खरकई नदी पर ग्रामीण विकास विभाग ब्रिज बना रहा है। इससे राजनगर क्षेत्र सीधे आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ जाएगा। ओड़िशा और चाईबासा से आने वाले वाहन सीधे आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र चले जाएंंगे। किसानों की जमीन की कीमत बढ़ जाएगी। हजारों एकड़ जमीन उद्योगों को उपलब्ध हो सकेगा।
लुआबासा ब्रिज : घोड़ाबांधासे आगे लुआबासा में सुवर्णरेखा नदी पर ब्रिज निर्माणाधीन है। मार्च तक इस ब्रिज के तैयार हो जाने की उम्मीद है। यह ब्रिज जहां बन रहा है, उक्त इलाका एकदम वीरान है। इस इलाके में भी लगभग 10 हजार एकड़ जमीन शहर के विस्तार के लिए उपलब्ध हो जाएगी। कई बिल्डरों ने इस इलाके में अपना प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए जमीन खरीद ली है। इस ब्रिज के बन जाने से गोविंदपुर, गदड़ा, घोड़ाबांधा और टेल्को के लोगों के लिए कोलकाता से आना-जाना लगभग 20 किलोमीटर कम हो जाएगा।
दोमुहानी ब्रिज : खरकईसुवर्णरेखा के संगम के पास यह ब्रिज प्रस्तावित है। इसके बन जाने से रांची या बोकारो के लिए एनएच-33 पर जाने की दूरी घट जाएगी। यह ब्रिज सीधे कांदरबेड़ा में जाकर एनएच-33 से मिलेगा। यह इलाका खाली है। सड़क नहीं होने के कारण हजारों एकड़ जमीन वीरान है। पुल बन जाने से रिहायशी और बड़े-बड़े वाणिज्यिक प्रोजेक्ट के लिए हजारों एकड़ जमीन उपलब्ध हो जाएगी।
हुरलुंग ब्रिज : यहब्रिज सुवर्णरेखा नदी पर हुरलुंग में बन रहा है। अगले डेढ़ साल में ब्रिज बनकर तैयार हो जाएगा। यह ब्रिज सीधे एनएच 33 से शहर की कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा। इससे पूर्वी क्षेत्र के लोगों को एनएच 33 पकड़ने में सहूलियत होगी। मोहरदा से लेकर एनएच-33 तक लगभग 7 किलोमीटर का बड़ा इलाका खाली है। उक्त इलाका लगभग बंजर के सामान है, जहां लगभग 10 हजार एकड़ जमीन उपलब्ध है। पुल बन जाने के बाद इस जमीन की कीमत बढ़ जाएगी। साथ ही एनएच से जुड़ते ही शहर के विस्तार के लिए उपलब्ध हो जाएगी। यहां उद्योग-धंधे पनप सकते हैं।
^प्रस्तावित पुल के बन जाने से जमीन की जो कमी है, वह दूर होगी। उद्यमी स्वयं भी जमीन खरीद सकेंगे। एक नया क्षेत्र मिल जायेगा। इससे औद्योगिक विस्तार को गति मिलेगी। उद्योगों के समक्ष जमीन की अनुपलब्धता की जो समस्या है, वह कम होगी। नए निवेशकों को निवेश का मौका मिलेगा। इंदरअग्रवाल, अध्यक्ष, एसिया
^बहुतसे बिल्डरों को बड़े-बड़े प्रोजेक्ट के लिए जमीन चाहिए, लेकिन शहर के विस्तार के लिए जमीन नहीं है। इन ब्रिजों के बन जाने से हजारों एकड़ जमीन औद्योगिक और व्यावसायिक तथा रिहायशी विकास के लिए उपलब्ध हो सकेगी। नए क्षेत्र शहर से जुड़ जाएंगे। सुरेशसोंथालिया, अध्यक्ष, सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स