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रजिस्ट्रार, एफओ और प्रभारी प्रिंसिपल के बयान कलमबंद

5 वर्ष पहले
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को-ऑपरेटिव कॉलेज से 50 लाख रुपए के हेराफेरी मामले में चार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

एजुकेशनरिपोर्टर | जमशेदपुर

गोलमुरीके अब्दुल बारी मेमोरियल (एबीएम) कॉलेज में लगभग 1.30 करोड़ रुपए के गबन मामले की जांच शुरू हो गई है। गुरुवार को कोल्हान यूनिवर्सिटी (केयू) के रजिस्ट्रार डॉ एससी दास, फायनेंस आफिसर सुधांशु कुमार कॉलेज के प्रभारी प्रिंसिपल डॉ एसबी तिवारी ने गोलमुरी थाने में डीएसपी अनिमेश नैथानी के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया। साथ ही पुलिस द्वारा मांगे गए अन्य कागजात भी उपलब्ध कराए।

को-ऑपरेटिव कॉलेज से लगभग 50 लाख रुपए के हेराफेरी मामले में भी केयू के रजिस्ट्रार की ओर से गुरुवार को बिष्टुपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। हालांकि कुछ कागजात नहीं होने के कारण अभी थाने में यह प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है। को-ऑपरेटिव कॉलेज से पैसे की गड़बड़ी मामले में कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल डॉ आरके दास के अलावा बर्सर एल कच्छप, एकाउंटेंट शंकर रजक प्यून कुलाकांत झा को आरोपी बनाया गया है।

^को आपरेटिव कॉलेज में गड़बड़ी से संबंधित शिकायत मिली है। इस संबंध में अभी प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है लेकिन एक दो दिन में प्रक्रिया पूरी करने के साथ ही प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरु कर दी जाएगी।^ जितेंद्रकुमार, थाना प्रभारी, बिष्टुपुर।

पुलिस कर रही राशि की हेराफेरी की जांच : नैथानी

एबीएमकॉलेज से वर्ष 2002 से 2009 तक राशि की हेराफेरी हुई है। इसकी शिकायत कोल्हान यूनिवर्सिटी की ओर की गई है। मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। यह जानकारी सिटी डीएसपी अनिमेष नैथानी ने गुरुवार को दी। उन्होंने बताया कि जांच के क्रम में यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार, एफओ प्रभारी प्रिंसिपल को कागजात के साथ बुलाया गया था। मामले से संबंधित कुछ कागजात रांची यूनिवर्सिटी के समय का है। इसलिए पुलिस ने मामले की जांच गहराई से शुरू कर दी है।

क्या है मामला

जमशेदपुरको-ऑपरेटिव कॉलेज में डॉ आरके दास के प्रिंसिपल रहते लगभग 50 लाख रुपए एबीएम कॉलेज में 1.30 करोड़ रुपए की हेराफेरी हुई है। इसकी शिकायत मिलने पर केयू के वीसी डॉ आरपीपी सिंह द्वारा मामले की जांच कराने पर आरोप सही पाया गया। राशि गबन के मामले में पूर्व प्रिंसिपल के साथ दोनों कॉलेज के बर्सर, एकाउंटेंट तथा प्यून की सहभागिता सामने आई थी। साथ ही एबीएम कॉलेज के वर्ष 2002-2006 तक का रिकार्ड भी गायब पाया गया है। इसके बाद केयू प्रशासन की ओर से दोनों कॉलेजों में गबन के मामले में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

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