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पांच दिन ड्यूटी के मुद्दे पर दो ग्रुप में बंटे कंपनी के अफसर

5 वर्ष पहले
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सप्ताहमें पांच दिन ड्यूटी के मुद्दे पर टाटा स्टील के अधिकारी दो ग्रुप में बंट गए हैं। यह ग्रुप है 45 वर्ष से ऊपर का और उससे नीचे के उम्र के अफसरों का। 45 वर्ष से ऊपर की उम्र वाले अफसर ड्यूटी की नई व्यवस्था से खुश नहीं हैं। वे दोपहर में लंच घर जाकर करना चाहते हैं।

उनकी दलील है कि वे लोग परिवार वाले हैं और उन्हें कई तरह की बीमारियां हैं, जिनकी दवा घर जाकर ही ली जा सकती है। वे दोपहर में घर जाकर अपने परिवार के साथ ही भोजन करना चाहते हैं। आधे घंटे का लंच होने के कारण वे घर नहीं जा पा रहे हैं। दूसरा ग्रुप है 45 वर्ष से कम उम्र वालों का। वे अपने कॅरियर को लेकर बहुत संजीदा हैं। एक दिन अतिरिक्त अवकाश मिलने से वे बहुत खुश हैं। उन्हें पढ़ने को अवसर नहीं मिलता था। एक और छुट्टी मिलने से उन्हें पढ़ने और सैर सपाटा के लिए समय मिल जा रहा है।

लंच का समय आधा घंटा होने से महिला कर्मी घर नहीं जा पा रही हैं। पहले दोपहर में वे घर जाती थीं और अपने बच्चों से मिल आती थीं। इससे महिला कर्मी बहुत निश्चिंत रहती थीं। लेकिन अब उनकी चिंता बढ़ गई है। इस कारण से महिला कर्मी अपनी परेशानी कमेटी मेंबरों के समक्ष रख रही हैं और उनका दबाव है कि ड्यूटी के पुराने सिस्टम को ही बहाल किया जाए।

पूरे जेनरल शिफ्ट मेें सप्ताह में पांच दिन ड्यूटी सिस्टम को लागू कर पाने में कर्मचारियों को मिलने वाला इंसेटिव रोड़ा बन रहा है। जेनरल शिफ्ट के कर्मचारियों को तीन तरह का इंसेटिव मिल रहा है। पहला 18 प्रतिशत, दूसरा 25 प्रतिशत और तीसरा 50 प्रतिशत। मिनिस्ट्रियल कर्मचारियों को 18 प्रतिशत इंसेटिव मिलता है, जो 5 दिन ड्यूटी का सिस्टम लागू हो जाने के बाद भी उन्हें मिल रहा है। नन मिनिस्ट्रियल के वैसे कर्मचारी जो केवल प्लांट में ड्यूटी करते हैं, उन्हें 25 प्रतिशत इंसेंटिव मिलता है। यह इंसेंटिव उन्हें 48 घंटा या उससे अधिक ड्यूटी करने के कारण मिलता है। इसी तरह से नन मिनिस्ट्रीयल कर्मचारी जो प्लांट और ऑफिस दोनों जगह ड्यूटी करते हैं, उनकाे 50 प्रतिशत इंसेंटिव मिलता है। नन मिनिस्ट्रयल कर्मचारियों का इंसेंटिव हजारों रुपए में होता है। सप्ताह में पांच दिन ड्यूटी होने पर उनकी कुल ड्यूटी 48 घंटे से कम हो जाएगी। इससे उन्हें इंसेटिव मिलना बंद जाएगा। इस कारण नन मिनिस्ट्रियल में लागू करने के लिए कुछ कर्मचारी यूनियन के समक्ष मांग कर रहे हैं, तो कुछ इंसेटिव को लेकर विरोध कर रहे हैं।

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