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वसंत पंचमी कल, विद्या की देवी मां शारदे की होगी आराधना

5 वर्ष पहले
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मांसरस्वती ज्ञान, सदबुद्धि, विवेक और यश प्रदान करने वाली देवी हैं। इस बार वसंत पंचमी 13 फरवरी को है, जो अनेक शुभ योग लेकर रही है। यह योग आपके समस्त श्रेष्ठ कार्य सफल बनाएंगे। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि अमृत योग है। ये दोनों ही योग शुभ कार्यों के लिए अतिश्रेष्ठ होते हैं। इनमें किया गया कार्य निर्विघ्न संपन्न होता है। वहीं, कुछ लोग शुक्रवार से ही पूजा शुरू कर रहे हैं।

पंडितों की मानें तो 13 फरवरी को सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग दिनभर रहेगा। वसंत पंचमी शुक्रवार दोपहर 12.43 बजे से शुरू होकर 13 फरवरी को सुबह 10.20 बजे तक रहेगी। काशी पंचांग में उदिया तिथि से व्रत की शुरुआत होती है, इसलिए वसंत पंचमी शनिवार को ही मनाई जाएगी। पंडित रमेश उपाध्याय ने बताया कि वसंत पंचमी पर सर्वार्थ सिद्धि अमृत सिद्धि योग इसे और खास बना रही है। पंडित संतोष त्रिपाठी ने बताया कि पंचमी तिथि (वसंत पंचमी) शिक्षा प्रारंभ करने का श्रेष्ठ दिन है। इस दिन मां सरस्वती के पूजन में पीले पुष्प का खास महत्व है। वसंत पंचमी पर बच्चों की पढ़ाई शुरू करने से पूर्व पट्टी पूजन की भी परंपरा है। इसके लिए सुबह 6.28 से 8.10 बजे तक का समय श्रेष्ठ है। वैसे शनिवार को दिनभर पूजा कर सकते हैं।

साकची बाजार में मां सरस्वती की प्रतिमा खरीदती युवती।

^इस दिन अबूझ मुहूर्त होने के साथ सर्वार्थ सिद्धि अमृत योग भी है। इससे इस पर्व का महत्व और बढ़ गया है। इस दिन जिनकी शादी है उनका दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। भगवान विष्णु मां सरस्वती की विधिवत रूप से पूजा करें। भगवान को प्रसन्न करने के लिए पूजा में विशेष रूप से पीले फूल अर्पित करें पीले मीठे चावल, पीले मिष्ठान का भोग लगाए। ^पंडित रमेशकुमार, ज्योतिषाचार्य

कुछ पारंपरिक पंचांगों ने 12 फरवरी को वसंत पंचमी बताई गई है। हालांकि, ज्यादातर पंचांगों ने 13 फरवरी को ही वसंत पंचमी शास्त्र सम्मत बताई गई है। इसलिए 13 फरवरी को ही वसंत पंचमी मनाना शास्त्र सम्मत होगा।

पूजाकी खरीदारी के लिए बाजार में रही भीड़

वसंतपंचमी के लिए मां सरस्वती की बड़ी मूर्तियां 35 सौ रुपए और छोटी 2500 रुपए में बिकी। कारीगरों ने बताया कि मूर्ति बनाने में एक माह लग जाता है। सूखने के बाद रंग करने में तीन दिन लगते हैं। वसंत पंचमी 12 फरवरी को है, लेकिन स्कूल-कॉलेज में इससे जुड़े कार्यक्रम दो-चार दिन पहले ही शुरू हो जाते हैं, इसलिए वे पहले से ही मूर्ति तैयार करके रखते हैं। शिक्षण संस्थानों में इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है।

अबूझमुहूर्त के कारण शादियों की रहेगी धूम

अबूझमुहूर्त होने के कारण शादी की धूम रहेगी। इसके कारण इन दिनों बाजार में रौनक है। सुबह से लेकर शाम तक बाजार में भीड़ देखी जा रही है। बैंड वाले भी तैयारी में जुटे हैं। घोड़ी वालों ने भी घोड़ी के नए कपड़े बनवाए हैं। रात में जाने वाली बारात के लिए भी नई स्टाइल की लाइट आई है। पंडित रमेश कुमार ने बताया कि इस दिन जिनकी शादी है, वे मां सरस्वती को सफेद फूल अर्पित करें। इससे उनका वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा।

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