फेस्ट की प्राइज मनी 7 लाख
रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा, एक आई लहर कुछ बचेगा नहीं...लिख जवां दिलों की धड़कन बने मोहब्बत के मशहूर कवि डॉ विष्णु सक्सेना की मोहब्बत भरी शायरी शुक्रवार 12 फरवरी की शाम को एनआईटी जमशेदपुर में गूंजेगी। इस दिन शुरू हो रहे संस्थान के कल्चरल फेस्ट में डॉ विष्णु सक्सेना अपनी मोहब्बत की शायरी लेकर रहे हैं। उनकी शायरी इंजीनियरों के दिल के तार झंकृत करेंगी। बकौल डॉ सक्सेना, मैं तो प्रेम और सौंदर्य का कवि हूं। कोशिश होगी कि वेलेंटाइन के इस मौसम में इंजीनियरों के दिल में मोहब्बत की आग लगाई जाए। कवितासुनायी :
डॉ.विष्णु सक्सेना
कार्यक्रम की तैयारी में जुटे विद्यार्थी।
13 फरवरी को 83 बैच का एल्युमिनी मीट
कल्चरलफेस्ट के दूसरे दिन शनिवार 13 फरवरी को 83 बैच के पूर्ववर्ती विद्यार्थियों का सम्मेलन होने जा रहा है, जो गुजरे लम्हों का याद करेंगे। संस्थान के प्रवक्ता दीपक चौरसिया ने बताया कि इस बैच के 50 स्टूडेंट्स रहे हैं, जिनमें से दर्जन भर विदेश से रहे हैं। इनमें लंदन में अपनी कंपनी लिंकोजडॉटकॉम शुरू करने वाले अनुराग सक्सेना और सीएनए फाइनेंशियल कार्पोरेशन शिकागो के आईटी डायरेक्टर अमित कुमार भी शामिल होंगे।
एनआईटी में डॉ विष्णु सक्सेना आज लगाएंगे मोहब्बत की आग
इस साल कल्चरल फेस्ट की प्राइज मनी 7 लाख रुपए है। संस्थान के छह फ्लैगशिप इवेंट्स हो रहे हैं, जिसकी प्राइज मनी बढ़ा दी गई है। इवेंट्स में गीत-संगीत, नृत्य और फैशन के साथ पत्रकारिता का रंग भी दिखेगा।
15 संस्थानों के 250 स्टूडेंट्स की भागीदारी
कल्चरलफेस्ट में इस साल 15 इंजीनियरिंग संस्थानों के 250 स्टूडेंट्स शिरकत करेंगे। इन संस्थानों में आईआईटी समेत कई एनआईटी भी शामिल हैं। इस साल फेस्ट का थीम जश्न इंडिया है। सारे फ्लैगशिप इवेंट्स इस थीम पर होंगे।
डॉ विष्णु सक्सेना के साथ इस कवि सम्मेलन में हास्य रस के मशहूर हस्ताक्षर एहसान कुरैशी भी हिस्सा लेंगे। फेस्ट के दूसरे दिन डीजे नाइट और अंतिम दिन अंडरग्राउंड अथॉरिटी बैंड का परफॉर्मेंस होगा।
दिल में मत आग लगा-दिल में मत आग लगा।
मेरा दामन सफेद है इसमें दाग लगा
बस्ती-बस्ती मैं घूमा हूं,
अपनी मस्ती में झूमा हूं
जाने कितने तूफां आए
पर इस लौ को बुझा पाए
सो रहे हैं मेरे अरमान इन्हें अब जगा...
जिसको हमने प्यार किया है
उस पर सब कुछ वार दिया है
जो भी कपट में चूर रहे हैं
उनसे सदा हम दूर रहे हैं
इस ज़मी पर उम्मीदों के कोई बाग लगा...
जाने कितनी कलियाँ देखीं
इश्क की यारो गलियाँ देखीं
फूल से कोमल तन देखे हैं,
भोले-भाले मन देखे हैं