विवादित भू आवंटियों से लगान वसूली पर लगी रोक
टाटालीज के विवादित 59 भूमि आवंटियों से लगान वसूली पर प्रशासन ने रोक लगा दी है। इस बाबत प्रशासन ने भूमि सुधार राजस्व विभाग के सचिव कमल किशोर सोन से दिशा निर्देश की मांग भी की है। दिशा-निर्देश के संबंध में डीसी डॉ. अमिताभ कौशल ने विभागीय सचिव को पत्र लिखा है, जबकि लगान की वसूली पर रोक लगाने के लिए टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट (कॉरपोरेट सर्विसेज) सुनील भास्करन को एडीसी सुनील कुमार ने पत्र लिखकर प्रशासन की ओर से लिए गए फैसले की जानकारी दी है।
मालूम हो कि टाटा लीज की जमीन जो 59 सबलीज धारकों को दी गई है, उसे प्रशासन लीजधारक नहीं मानता है। प्रशासन इन्हें भूमि आवंटी मानता है। प्रशासन का मानना है कि जब जमीन लीज पर दी ही नहीं गई है, तो लगान की वसूली कैसे की जा सकती है।
टाटा स्टील करेगा सूचित
एडीसीकी ओर से टाटा स्टील को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि हाईकोर्ट के निर्देश के आलोक में गठित जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। जब तक राज्य सरकार की ओर इस संबंध में कोई फैसला लेकर जिला प्रशासन को सूचना नहीं दी जाएगी, तब तक भूमि आवंटियों से लगान प्राप्त नहीं किया जाएगा पत्र में टाटा स्टील प्रबंधन को इसकी सूचना सभी भूमि आवंटियों को देने की बात कही गई है।
सचिव को लिखा पत्र
डीसीने भूमि सुधार राजस्व निबंधन विभाग के सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि लगान का विषय सबलीज के अस्तित्व से जुड़ा हुआ है। सबलीज से जुड़े वैधानिक पहलुओं पर प्रसंगाधीन जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी है। ऐसी परिस्थिति में राज्य सरकार द्वारा प्रश्नगत सबलीज पर निर्णय लिए जाने के पूर्व उन भूमि आवंटियों से लगान वसूली की कार्रवाई करना समुचित प्रतीत नहीं होता है। डीसी ने विभागीय सचिव से लगान वसूली के संबंध में निर्देश मांगा है।
59 सबलीज धारकों में से सात आवंटियों ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी कि उनसे ज्यादा लगान की वसूली की जा रही है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि सात आवंटियों पर दबाव डालकर ज्यादा लीज राशि की वसूली नहीं की जाए। टाटा लीज की जिस भूमि का आवंटन किया गया था, उसका आवंटियों से करार भी नहीं किया गया था। प्रशासन ने लगान की वसूली पर रोक के लिए इसेे भी आधार बनाया है। लगान का मुद्दा सबलीज जुड़ा हुआ है। टाटा स्टील का लैंड डिपार्टमेंट भूमि आवंटियों से लगान की वसूली करता है। इसमें से पांच प्रतिशत राशि टाटा स्टील अपने पास रखकर शेष राशि सरकारी कोषागार में जमा करा देती थी। अब इस व्यवस्था पर रोक लग जाएगी।
इन्होंनेदायर की है याचिका
टाटाब्लू स्कोप लिमिटेड, प्रीमियम रेसिडेंसी प्राइवेट लिमिटेड, पी एंड एम इंफ्रास्ट्रक्चर, कौशल कंचन कंस्ट्रक्शन, ऋषिराज होम्स प्राइवेट लिमिटेड, मारजोरजियस आरोथोडिक्स सीरियन चर्च और आरएच अमीन, जवाहरलाल बिग, जयंत लाल बदानी, आरएस भाटिया और कृपाशंकर।
टाटा स्टील प्रशासन की ओर से वर्ष 2006 से 2008 के बीच बड़े पैमाने पर टाटा लीज की जमीन को सबलीज पर आवंटित करने की कार्रवाई की गई थी। सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स ने सबलीज के आवंटन में अनियमितता बरते जाने की शिकायत सरकार से की थी। सरकार ने इसकी जांच तत्कालीन राजस्व पर्षद के सदस्य देवाशीष गुप्ता से कराई थी। जांच रिपोर्ट में अनियमितता बरते जाने की शिकायत को सही पाया गया था। इसके बाद सरकार ने 59 स्थानों पर चले रहे निर्माण कार्य पर रोक लगा दी। निर्माण कार्य पर रोक लगाए जाने के बाद भूमि आवंटियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट से सरकार को जांच कराने का आदेश दिया गया। साथ ही यह भी आदेश दिया जिनको भूमि का आवंटन किया गया है, वे अपने जोखिम पर निर्माण करा सकते हैं।