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शहर के उद्यमियों के आइडिया को साकार रूप देगा एनएमएल

5 वर्ष पहले
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राष्ट्रीयधातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल) जमशेदपुर उद्यमियों के नए आइडिया को साकार करेगा। संस्थान में बुधवार को टेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर का उदघाटन हुआ, जो उद्यमियों को एक छत के नीचे तकनीक से लेकर वित्तीय मदद के सारे सोल्यूशन्स उपलब्ध कराएगा। इस केन्द्र के जरिए एनएमएल उद्यमियों को तकनीक और ढाचागत संरचना का सहयोग करेगा। उद्यमियों के आइडिया को जमीन पर उतारने के लिए सिडबी वित्तीय मदद और एक्सएलआरआई बिजनेस मॉडल बनाने में सहयोग करेगा।

केन्द्र का उदघाटन करते भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के उप महाप्रबंधक के आर सैम्यूल ने उद्यमियों से कहा कि सिडबी आपके आइडिया को वित्तीय मदद देने को तैयार है, बशर्ते वह आइडिया वाणिज्यिक तौर पर फिजिबल हो। राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल) जमशेदपुर में टेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर के उदघाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि सैम्यूल ने कहा कि भारत सरकार के मेक इन इंडिया प्लान में स्माइल योजना के तहत सिडबी उद्यमियों को शुरुआती तीन साल तक बेहद कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराता है। तीन साल के बाद ब्याज दर नॉर्मल हो जाएगी। इसके अलावा फंड टू फंड योजना के तहत बैंक ऋण देता है। उन्होंने बताया कि अगर आपके नए आइडिया को बैंक और सरकार की ओर से बनाई गई तकनीक कमेटी हरी झंडी दे देती है, तो फिर ऋण मिलना आसान हो जाता है।

उद्यमियोंने जानी एनएमएल की सक्सेस स्टोरी

स्वागतसमारोह के बाद उद्यमियों ने एनएमएल की सक्सेस स्टोरी जानी और एनएमएल का भ्रमण किया। डॉ. एस कुमार ने जियो पॉलीमर, डॉ. केके साहू ने आयरन ऑक्साइड, डॉ. केएल साहू ने ब्रास मेल्टिंग फर्नेस, डॉ एके मोहंती ने एंटी टर्निशिंग लीकर, डॉ. आरके साहू ने ग्राफीन कोटेड स्टील और डॉ. डी मिश्रा ने टंगस्टन पाउडर के बारे में जानकारी दी।

क्या है टेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर

टेक्नोलॉजीइन्क्यूबेशन सेंटर खनिज, धातु और पदार्थ क्षेत्र के उद्योगों को प्रौद्योगिकी सेवाएं उपलब्ध कराएगा। केन्द्र के खोलने का मकसद उद्योगों को ऐसा मंच उपलब्ध कराना है, जिसमें नवीन प्रक्रिया और आइडिया को विकसित किया जा सके।

भारत के लिए

चुनौती बना चीन

एक्सएलआरआईके प्रोफेसर संजय पात्रा ने कहा कि आज भारत ही नहीं पूरी दुनिया में नए उद्यम (स्टार्टअप) पर जोर है। भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में परंपरागत उद्योग युवाओं को रोजगार मुहैया कराने में असफल रहे हैं। स्टील जैसा सेक्टर भी मंदी की गिरफ्त में है। 15 साल पहले तक जो चीन दूसरे देशों से स्टील आयात करता था, आज वह स्टील का सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है। भारत के साथ ही दूसरे देशों के स्टील उद्योग के सामने चीन आज मुख्य चुनौती बना हुआ है। स्टील की लगातार गिरती कीमत को संभालने के लिए सरकार को सामने आना पड़ा है और उसे कर लगाने पड़े हैं, ताकि स्टील इंडस्ट्री को अपना मैनुफैक्चरिंग कॉस्ट सके।

एक छत के नीचे आइडिया से लेकर प्रोडक्ट डिजाइनिंग तक के सॉल्यूशन्स

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