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जेलों में बंद महिला कैदियों के 34 बच्चों को स्कूल नहीं भेज पाए जेल और कल्याण विभाग

4 वर्ष पहले
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सीएस के दिशा-निर्देशों की भी अनदेखी, सिर्फ लेटरबाजी की फॉर्मेलिटी करने में ही व्यस्त हैं अफसर

राज्य की विभिन्न जेलों में बंद महिला कैदियों के बच्चों का बचपन जेल की चहारदीवारी में बर्बाद हो रहा है। इन बच्चों की संख्या 34 है। इनको बेहतर तालीम मिल पा रही है और ही अन्य जरूरी सुविधाएं। और इसके लिए जिम्मेदार है जेल और कल्याण विभाग के वह अफसर, जो इन बच्चों के प्रति संवेदना तो दिखाते हैं, लेकिन मैदानी स्तर पर कुछ करते नहीं।

डीबी स्टार की छानबीन में पता चला कि ये बच्चे अपनी मांओ के साथ जेल में बिना किसी गलती के सजा भुगत रहे हैं। कभी मां की गोद में तो कभी अंगुली पकड़े वे भी जेल के कायदे कानून निभाते नजर आते हैं। मां काम करती है तो साथ होते हैं। और जब मां सलाखों के पीछे जाती है, तो भी साथ होते हैं। नियमानुसार 6 साल की उम्र तक मां की इच्छा पर उन्हें जेल में ही रहना पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में महिला कैदियों के बच्चों की सुरक्षा जीवनस्तर के बारे में कई निर्देश दिए थे। लेकिन राज्य में इनका पालन नहीं हो रहा। 20 अप्रैल 2017 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में जेलों की स्थिति की समीक्षा के दौरान निर्देश दिया गया था कि महिला कैदियों के साथ रह रहे 4 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों का नामांकन आवासीय/आश्रम या गुरुकुल विद्यालयों में कराना चाहिए। जेल आईजी ने 16 मई को इस संबंध में कल्याण विभाग को पत्र भेजा था। मगर अब जेल विभाग को नहीं पता कि इन बच्चों का एडमिशन हुआ है या नहीं?

इस मामले में कल्याण सचिव अन्य अफसरों से बात करने के लिए 2 दिन तक फोन किए गए, मगर वे सामने नहीं आए।

बात करने से बच रहे अफसर

जेल आईजी ने लिखा है कि महिला कैदियों के साथ पल रहे बच्चों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट की ओर भी आदेश पारित किया गया है। इसमें कहा गया है कि महिला बंदियों के साथ रह रहे 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए विशेष आहार, क्रैच की व्यवस्था, टीकाकरण, चिकित्सकीय जांच एवं इलाज की व्यवस्था करनी है। राज्य की जेलों में यह व्यवस्था की गई है। जहां तक निकटतम आवासीय विद्यालयों में बच्चों का नामांकन का सवाल है तो इस पर कल्याण विभाग को समुचित कार्रवाई करनी है।

जेल आईजी ने कल्याण सचिव हिमानी पांडे को लिखे पत्र में कहा है कि 20 अप्रैल 2017 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य की जेलों की स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि महिला कैदियों के साथ रह रहे 4 वर्ष के अधिक उम्र के बच्चों का नामांकन आवासीय, आश्रम या गुरुकुल विद्यालयों में कराया जाना चाहिए। इसके लिए जेल विभाग कल्याण विभाग से त्वरित कार्रवाई करे, ताकि बच्चों के भविष्य को संवारा जा सके। जेल में पल रहे बच्चों के शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित कराने के लिए कल्याण विभाग द्वारा नामांकन के नियमों में शिथिलता का एक प्रस्ताव तैयार किया जाना चाहिए।

16 मई को कल्याण विभाग को पत्र भेजा था। इसके अलावा फिर से 18 बच्चों के बारे में सूचना दी गई है। एडमिशन के संबंध में कल्याण विभाग की ओर से की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी ली जाएगी। बच्चों का एडमिशन जल्द कराने की दिशा में जल्द ठोस कार्रवाई की जाएगी। जटाशंकरचौधरी, जेल आईजी

12 मई 2017 तक की रिपोर्ट

जेल महिला बंदी बच्चे

जमशेदपुरमेचो आलदा (35 वर्ष) सावित्री आलदा (6 वर्ष)

जमशेदपुर सुदीना देवी (50 वर्ष) सुमित झा (4 वर्ष)

होटवार सोमवारी देवी (33 वर्ष) चितरंजन मुंडा (4.5 वर्ष)

होटवार सुनीता देवी (33 वर्ष) छोटू कुमार (4 वर्ष)

होटवार रेखा देवी (33 वर्ष) प्रियांशु सिंह (5 वर्ष)

हजारीबाग जुलेखा बीबी (55 वर्ष) गुलनाग खातून (6 वर्ष)

हजारीबाग देवंती देवी (30 वर्ष) अंकित राठौड़ (5 वर्ष)

दुमका मलोटी टुडू (30 वर्ष) बादल हेम्ब्रम (5.10 वर्ष)

दुमका दीपिका मुर्मू (27 वर्ष) नीरमंती कुमार (4.4 वर्ष)

दुमका मीरा डे (35 वर्ष) रुद्रा डे (5.1 वर्ष)

दुमका पनवती देवी (26 वर्ष) शिवम कुमार (5.1 वर्ष)

दुमका पंचा देवी (38 वर्ष) अजीत कुमार (4.1 वर्ष)

दुमका बीबी रुबेदा (45 वर्ष) आफरीन खातून (4.6 वर्ष)

दुमका माकु हांसदा (23 वर्ष) गुलाल मुर्मू (5.9 वर्ष)

DB STAR EXPOSE

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