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ब्रह्मानंद,मेहरबाई मेडिका में होगा बीमितों का इलाज

5 वर्ष पहले
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ईएसआईसी के बीमितों के लिए अच्छी खबर है। स्टेट कमिश्नर द्वारा गठित टीम ने शहर के तीन बड़े अस्पतालों का दौरा के बाद इनके साथ टाईअप करने को हरी झंडी दे दी है। अब केवल समझौते पर हस्ताक्षर होना बाकी है। इस प्रकार प्रबंधन द्वारा अपने बीमितों को नए साल की सौगात देने के वायदे पूरे होने वाले हैं। बीमितों के आश्रितों को अब गंभीर बीमारी के इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा, उनका इलाज जमशेदपुर के ही सुपर हॉस्पिटेलिटी अस्पताल में होगा।

मेडिका,ब्रह्मानंद मेहरबाई से टाईअप : दोदिन पूर्व ईएसआईसी की स्टेट कमिश्नर द्वारा गठित टीम ने जमशेदपुर के सुपर हॉस्पिटेलिटी की सुविधा वाले तीन अस्पताल बिष्टुपुर स्थित मेडिका, मेहरबाई कैंसर अस्पताल तथा हृदय रोग विशेषज्ञ अस्पताल ब्रह्मानंद हृदयालय का दौरा किया और सुविधाएं देखने के बाद प्रबंधन से वार्ता की है। इसमें टाईअप करने की प्रक्रिया को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है।

^सांसद विद्युतवरण महतो ने पिछले दिनों हमें गंभीर बीमारियों के इलाज की व्यवस्था शहर के अस्पतालों में ही उपलब्ध कराने संबंधी ज्ञापन सौंपा था। जिस पर मैंने स्टेट कमेटी को त्राहिमाम पत्र भेजकर पूर्व में स्वीकृत प्रस्तावों का हवाला देते हुए इसे यथाशीघ्र पूरा करने की सिफारिश की थी। इस पर स्टेट कमेटी ने गंभीरता दिखाते हुए दो दिन पूर्व जमशेदपुर का दौरा कर तीन बड़े अस्पतालों का दौरा कर वहां के प्रबंधन से बात की और सकारात्मक पहल की है। एक दो दिन में एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर भी हो जाएंगे।^डॉ अखौरीमिंटू सिन्हा, प्रवक्ता

दर्जन भर मरीज प्रतिदिन होते हैं रेफर

ईएसआईसीप्रबंधन से मिली जानकारी अनुसार यहां से प्रतिदिन 10 से 12 मरीजों को गंभीर बीमारी की इलाज के लिए शहर से बाहर भेजा जाता है। इसपर प्रबंधन का लाखों रुपए खर्च होता है साथ ही बीमितों को भी आने जाने का खर्च परेशानियों का सामना करना पड़ता है। टाईअप के बाद इन्हें परेशानियों से निजात मिलेगी वहीं प्रबंधन को भी राहत मिलेगी।

10माह पूर्व प्रबंधन ने भेजा था प्रस्ताव

ईएसआईसीका लोकल प्रबंधन 10 माह पूर्व शहर के बड़े अस्पतालों से टाईअप के लिए स्टेट कमिश्नर को प्रस्ताव भेजा था। जो मंजूर भी कर ली गई थी और एक माह के अंदर कमेटी गठित कर टाईअप के लिए चुने जाने वाले अस्पतालों का निरीक्षण करानी थी, लेकिन कारणवश कमेटी गठित में विलंब हुआ। लिहाजा इसमें 10 माह का समय लग गया।

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