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  • एनआईटी जमशेदपुर के कल्चरल फेस्ट में कवि सम्मेलन का आयोजन

एहसान कुरैशी की अतान पर झूमे भावी इंजीनियर

5 वर्ष पहले
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जमशेदपुर. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) जमशेदपुर में शुक्रवार को आयोजित कवि सम्मेलन में हास्य के साथ प्रेम और सौंदर्य के रंग भी खूब जमे। संस्थान के कल्चरल फेस्ट के तहत कवि सम्मेलन में द ग्रेट इंडियन लॉफ्टर शो फेम एहसान कुरैशी की अतान ने जहां इंजीनियरों को गुदगुदाया, वहीं डॉ विष्णु सक्सेना की प्रेम कविताओं ने वाह-वाह करने को मजबूर किया।
आलम यह था कि डेढ़ घंटे तक भावी इंजीनियर इन कवियों की रचनाओं पर झूमते और लोटपोट होते रहे। एहसान कुरैशी ने एनआईटी के स्टूडेंट्स तो छा गए, हम मुंबई से लौटकर आ गए...को आवाज देकर अपनी पहचान बताई। कविताओं के बीच उनके चुटकीले और हंसते-हंसाते गंभीर बातें कहने का निराला अंदाज सबको भा गया।

उन्होंने संस्थान के निदेशक डॉ रामबाबू कोडाली को थ्री इडियट्स में बोमन ईरानी के चरित्र के साथ जोड़ा और उसे अपने खास अंदाज में पेश किया- रामबाबू जी आप महान हैं, पूरे कॉलेज की शान हैं; हम तो समझ रहे थे कि आप देवानंद होंगे, मगर आप तो दबंग के सलमान खान हैं।

कुरैशी ने कविता को लेकर 24 देशों की यात्रा पर अपना कविताई वृतांत बताया और भारत के बारे में कहा-यहां चेहरे नहीं, इंसान पढ़े जाते हैं; मजहब नहीं, ईमान पढ़े जाते हैं। यह देश इसलिए महान है दोस्तों, यहां एक साथ गीता और कुरान पढ़े जाते हैं।
उन्होंने मलिका शेरावत से लेकर सन्नी लियोनी पर फब्तियां कर लड़कों को खूब हंसाया। यही नहीं, सानिया मिर्जा और शोएब मल्लिक से शादी का खूब मजाक उड़ाया। कहा- सानिया जी, सानिया जी, गजब ढा रही हो; टेनिस का रैकेट, क्रिकेट के बैट से टकरा रही हो...। कुरैशी ने फिल्मी गीतों के बेतुके बोल पर भी चुटकियां लीं। जाते-जाते मां पर अपनी रचना पढ़ सबको अपना मुरीद बनाया।
तुम भी महक रहे हो, हम भी महक रहे हैं
कुरैशी के चुटीले अंदाज से शुरू हुआ कवि सम्मेलन डॉ विष्णु सक्सेना की प्रेम कविताओं से परवान चढ़ा। कविताओं की पिच पर भले ही वे कम देर रहे, मगर अपनी प्रस्तुति से सीधे भावी इंजीनियरों के दिल में उतरे।
अपनी मशहूर कविता- हमें कुछ पता नहीं है, हम क्यों बहक रहे हैं, रातें सुलग रही हैं, दिन भी दहक रहे हैं, जबसे है तुमको देखा, बस इतना जानते हैं, तुम भी महक रहे हो, हम भी महक रहे हैं...गाकर युवाओं के दिल पर सीधे दस्तक दी।
एक और गीत प्यास बुझ जाए तो शबनम खरीद सकता हूं, जख्म मिल जाए तो मरहम खरीद सकता हूं...सुनाकर इंजीनियरों को पागल बनाया। कवि सम्मेलन में रसिक गुप्ता, दीपक गुप्ता और कवयित्री पूनम वर्मा ने भी अपनी रचनाएं पढ़ीं। इसके पहले छऊ नृत्य हुआ। कार्यक्रम का उदघाटन संस्थान के निदेशक डॉ रामबाबू कोडाली ने किया।
पहले दिन 10 स्पर्धाएं
एनआईटी जमशेदपुर के कल्चरल फेस्ट के तहत शुक्रवार को पहले दिन रंगोली, सोलो डांस, ईस्टर्न वोकल, वेस्टर्न वोकल, इंग्लिश डिबेट, बैटल ऑफ बैंड्स, रंगमंच, फेस पेंटिंग, जस्ट ए-मिनट और लोक नृत्य प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।

आज फैशन शो होगा आकर्षण का केन्द्र
फेस्ट के दूसरे दिन शनिवार को फैशन शो आकर्षण का केंद्र होगा। शाम को आयोजित होने वाले इस इवेंट में देश भर के बिजनेस स्कूलों के स्टूडेंट्स रैंप पर धमाल मचाएंगे।
इसके अलावा हिंदी डिबेट, पोशाक, मोनो एक्टिंग, वेस्टर्न वोकल, ट्रेजर हंट, क्विज, इंस्टैंट एड, ड्यूट वोकल, आरजे हंट, टी शर्ट पेंटिंग और ग्रुप सांग की प्रतियोगिताएं होंगी। शाम को डीजे एनवायके का परफॉर्मेंस होगा।
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