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  • एनआईटी के 83 बैच के छात्र पराग वर्मा आईआरएसडीसी के पहले सीईओ हैं

देश के रेलवे स्टेशनों की सूरत बदलेंगे एनआईटी के एक्स स्टूडेंड पराग

5 वर्ष पहले
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जमशेदपुर. रीजनल इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (वर्तमान में एनआईटी) जमशेदपुर के 83 बैच के छात्र रहे पराग वर्मा 2013 में भारत सरकार के रेल मंत्रालय की ओर से स्थापित इंडियन रेलवे स्टेशन डेवलेपमेंट कारपोरेशन (आईआरएसडीसी) के पहले सीईओ हैं, जो देश के रेलवे स्टेशनों को अत्याधुनिक सुविधाएं से लैस करने जा रहे हैं। एनआईटी के पूर्ववर्ती विद्यार्थियों के मिलन समारोह में शहर आए पराग ने दैनिक भास्कर को बताया कि एनआईटी ने उन्हें न केवल सपने देखने, बल्कि उसे साकार करने का हौसला भी दिया। पराग के मुताबिक उन्हें दो कंपनियों के संस्थापक सीईओ बनने का गौरव प्राप्त है।
जाने पराग वर्मा को...
-एनआईटी जमशेदपुर के 83 बैच के छात्र रहे पराग वर्मा ने मोतीलाल नेहरू नेशनल इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी इलाहाबाद से एमटेक किया।
-एमटेक करने के बाद 1991 में इरकॉन से जुड़े। उन्होंने 1996 से लेकर 2002 के बीच इरकॉन के मलेशिया प्रोजेक्ट के लिए काम किया।
-उन्होंने जम्मू एंड कश्मीर में भी अपना योगदान दिया।
-2009 में इरकॉन इन्फ्रास्ट्रक्चर सर्विसेस लिमिटेड नाम से नई कंपनी शुरू की, जिसके वे सीईओ बने।
-2012 भारत में आईआरएसडीसी के अस्तित्व में आने के वह इसके पहले सीईओ बने।

जब रेल मंत्रालय ने इंडियन रेलवे स्टेशन डेवलेपमेंट कारपोरेशन (आईआरएसडीसी) की स्थापना की, तो मेरे अनुभवों को देखते हुए इसका पहला सीईओ मुझे बनाया। आईआरएसडीसी, रेल लैंड डेवलपमेंट ऑथोरिटी (आरएलडीए) और इन्फ्रास्ट्रक्चर की मशहूर कंपनी इरकॉन (इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड) का संयुक्त उपक्रम है।
इंडियन रेलवे स्टेशन डेवलेपमेंट कारपोरेशन का मकसद रेलवे की भूमि का वाणिज्यिक इस्तेमाल कर उसके राजस्व से स्टेशनों पर सुविधाएं बढ़ाना है। मूल रूप से बिहार के बक्सर के रहने वाले पराग ने बताया कि रेलवे की काफी जमीन स्टेशन के आसपास होती है, जो या अतिक्रमित होती है या इस्तेमाल नहीं होती। यह जमीन न केवल महंगी होती है, बल्कि वाणिज्यिक इस्तेमाल के दृष्टिकोण से भी उपयोगी होती है।
कैसे आएगा पैसा
आईआरएसडीसी रेलवे की जमीन डेवलपर्स को 45 साल की लीज पर देगा। इसके एवज में जो पैसा मिलेगा, उसका इस्तेमाल स्टेशन के विकास में होगा।
कल खुलेगा टेंडर
इसका टेंडर 16 फरवरी को खुलेगा। इसके बाद इसका स्वरूप सामने आएगा।
पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 7 स्टेशन
पराग वर्मा ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए देशभर के सात स्टेशनों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। ये स्टेशन हैं- हबीबगंज (भोपाल), आनंद विहार और बृज वासन (दिल्ली), चंडीगढ़, शिवाजीनगर (पुणे), सूरत और गांधीनगर। इनकी सफलता के बाद देश के दूसरे स्टेशनों में भी विस्तार किया जाएगा।
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