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प्रशासन को सौंपी कर्मचारियों की सूची, 12 बजे अिधकारी करेंगे कंपनी का दौरा

6 वर्ष पहले
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जमशेदपुर। टाटा स्टील प्रबंधन ने अपने कर्मचारियों की सूची मंगलवार शाम जिला प्रशासन को सौंप दी। टाटा वर्कर्स यूनियन चुनाव के निर्वाची पदाधिकारी सुनील कुमार ने मंगलवार की सुबह टाटा स्टील के एचआरएम चीफ बीबी दास को नोटिस कर डिपार्टमेंट व सेक्शन वार कर्मचारियों की सूची देने का आदेश दिया था।

दो तरह की सूची सौंपी
टाटा स्टील प्रबंधन की ओर से दो तरह की सूची प्रशासन को सौंपी गई है। एक सूची एमओआर (मेन ऑफ रोल) की है, जबकि दूसरी टाटा वर्कर्स यूनियन के सदस्यों की है। एमओआर की संख्या करीब 15500 है। कंपनी प्रबंधन की ओर से दी गई सूची में करीब छह सौ ऐसे कर्मचारी है जो टाटा वर्कर्स यूनियन के सदस्य नहीं हैं।
आज दोपहर 12 बजे अिधकारी करेंगे कंपनी का दौरा
चुनाव के लिए निर्वाचन क्षेत्र का निर्धारण करने के लिए गठित की गई टीम के सदस्य बुधवार को कंपनी परिसर का निरीक्षण करेंगे। डीसी डॉ अमिताभ कौशल ने क्षेत्र के निर्धारण के लिए एक कमेटी का गठन किया है। कमेटी में एडीसी सुनील कुमार, जिला आपूर्ति पदाधिकारी दिलीप कुमार तिवारी, आईटीडीए के निदेशक परमेश्वर भगत, एसडीओ प्रेमरंजन व डीएलसी एसएस पाठक शामिल हैं। कमेटी में शामिल अधिकारी कल दोपहर 12 बजे कंपनी का दौरा करेंगे। इस दौरान वे कर्मचारी से बातचीत भी करेंगे।
अधिकारी निर्वाचन क्षेत्र के निर्धारण के साथ कंपनी परिसर में चुनाव कराने के लिए स्थान का भी मुआयना करेंगे। प्रशासन इस बार चुनाव कंपनी परिसर के अंदर कराना चाहता है। प्रशासन को इस बात की पक्की जानकारी है कि पिछले चुनाव में शहर के आपराधिक गुट ने चुनाव को प्रभावित किया था। पिछली बार चुनाव जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हुआ था। उस दौरान शहर के बिल्डर व एक क्षेत्रीय दल के आपराधिक चरित्र के नेता ने चुनाव जीतने वाले कमेटी मेंबर पर दबाव बनाकर चुनाव कार्य प्रभावित किया था।
टाटा वर्कर्स यूनियन के अब तक के अध्यक्ष
अध्यक्ष कार्यकाल
स्व. एसएन हलधर : 1920 से 1922
स्व. सीएफ एन्ड्रूज : 1922 से 1928
स्व. सुभाषचंद्र बोस : 1928 से 1936
स्व. अब्दुल बारी सिद्दिकी : 1936 से 1947
स्व. माइकल जॉन : 1947 से 1977
स्व. वीजी गोपाल : 1977 से 1993
स्व. एसके बेंजामिन : 1993 से 2002
आरबीबी सिंह : 2002 से 2005
रघुनाथ पांडे : 2006 से 2012
पीएन सिंह : 2012 से अब तक
नामांकन के लिए जाना पड़ सकता है अंचल कार्यालयचुनाव के लिए जमशेदपुर अंचल कार्यालय में नामांकन हो सकता है। डीसी ने मंगलवार को अंचल कार्यालय में जनता दरबार की समाप्ति के बाद परिसर में नामांकन पत्र के वितरण एवं जमा लेने की संभावना पर गौर किया। अंचल कार्यालय में बड़ा भवन खाली मिला। चुनाव कार्य में लगाए गए अधिकारी एक बार फिर अंचल कार्यालय का मुआयना करेंगे। इसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। पिछले चार चुनाव में जिला प्रशासन के अधिकारी और कुछ कर्मचारी यूनियन कार्यालय आते थे। कमेटी मेंबर का चुनाव लड़ने के इच्छुक कर्मचारी यूनियन कार्यालय में नामांकन कार्य करते थे। यूनियन कार्यालय में कर्मचारियों का यूं ही आना-जाना लगा रहता है। इस कारण नामांकन के लिए उन्हें कोई मशक्कत नहीं करनी पड़ती थी। इस बार प्रशासन ने चुनाव में यूनियन अथवा टाटा स्टील की परिसंपत्ति का न्यूनतम उपयोग करने का फैसला लिया है।
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कर्मचारियों के बीच चर्चा
कैसे होगा चुनाव, ग्लोबल या निर्वाचन क्षेत्र बनाकर
टाटा वर्कर्स यूनियन का चुनाव कैसे होगा, इस पर कर्मचारियों के बीच चर्चा शुरू हो गई है। चर्चा इस बात को लेकर है कि चुनाव ग्लोबल होगा या निर्वाचन क्षेत्र बनाकर। पिछला चुनाव ग्लोबल हुआ था। प्रबंधन ग्लोबल चुनाव के पक्ष में नहीं था और न अब है। ग्लोबल चुनाव होने से कई विभागों के कई सेक्शन का प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाता है। इससे कर्मचारियों की बात प्रबंधन तक नहीं पहुंच पाती है। ग्लोबल चुनाव होने से एक सेक्शन से कई लोग चुनाव जीत कर आ जाते हैं। इस तरह के उदाहरण, एलडी-1, एलडी-2, कोक प्लांट और एसएमडी में देखने को मिला है।

ग्लोबल चुनाव से प्रत्याशियों को परेशानी : ग्लोबल चुनाव होने से प्रत्याशियों को भी परेशानी होती है। सभी प्रत्याशियों को पूरे विभाग में प्रचार करना पड़ता है। एक-एक कर्मचारी से मिलना पड़ता है। उनके घर जाना पड़ता है। कई विभागों में एक हजार से अधिक कर्मचारी हैं। सबसे मिल पाना प्रत्याशियों के लिए संभव नहीं हो पाता है। कर्मचारियों को भी कहीं 10, तो कहीं 15 वोट देना पड़ता है। निर्वाचन क्षेत्र बना कर चुनाव कराने से कर्मचारियों को एक वोट ही देना पड़ेगा।ग्लोबल चुनाव की स्थिति में जितने पद होते हैं, उतना वोट देना पड़ता है। इस परेशानी से बचने के लिए ज्यादातर कमेटी मेंबर और कर्मचारी चाहते हैं कि चुनाव निर्वाचन क्षेत्र बना कर हो, ताकि यूनियन में सबको प्रतिनिधित्व मिल सके।

प्रबंधन को भी यूनियन से वार्ता करने में दिक्कत : ग्लोबल चुनाव के बाद प्रबंधन को भी यूनियन के साथ किसी विभागीय मुद्दे पर वार्ता करने में दिक्कत होती है। किसी सेक्शन से जुड़े मसले पर भी बातचीत करने के लिए उस विभाग के सभी कमेटी मेंबर को बुलाना पड़ता है। वैसे हालात में किसी मुद्दे पर सहमति बना पाने में बड़ी दिक्कत होती है। एलडी-1 का एक उदाहरण लिया जा सकता है। प्रबंधन ने ऑपरेशन के रि-ऑर्गनाइजेशन पर वार्ता बुलाई, तो उस समय ग्लोबल चुनाव होने के कारण मेंटेनेंस के कमेटी मेंबरों को भी बुलाना पड़ा ।