जमशेदपुर. यूं तो गरीबों और लाचारों के उद्धार के लिए राज्य और केंद्र सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। लेकिन सरकारी बाबुओं की लापरवाही और उदासीनता के कारण ये योजनाएं धरातल पर नहीं उतर पातीं। इससे सीधे तौर पर समाज की अंतिम कतार में खड़ा व्यक्ति प्रभावित हो जाता है। इसी तरह की परेशानी झेलने को विवश हैं बड़ा गोविंदपुर बस्ती के 100 से ज्यादा निर्धन परिवार। वृद्धा और विधवा पेंशनकार्ड होने के बावजूद यहां के लोगों को पिछले कई माह से पेंशन नहीं मिली है।
पूछताछ कर चले जाते हैं बाबू
बड़ा गोविंदपुर बस्ती के जरूरतमंद लोगों का कहना है कि बस्ती में कई लोग पेंशन के हकदार हैं, लेकिन उनका कार्ड नहीं बनाया गया है। जिनके पास कार्ड है, उन्हें भी पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है। अभी तक कई बार सरकारी बाबू यहां आ चुके हैं। वे हमलोगों से नाम, पता और उम्र पूछ कर चले जाते हैं। हमलोग हर रोज पेंशन का इंतजार करते हैं।
अब कैसे कटेगा बुढ़ापा
बड़ा गोविंदपुर बस्ती के ज्यादातर लोगों का कहना है कि जवानी तो हमने मेहनत-मजदूरी करके हमने काट ली। लेकिन बुढ़ापा में शरीर लाचार हो जाता है। मेहनत-मजदूरी करना अब संभव नहीं है। इसलिए हमारे लिए तो पेंशन ही जीवन का आधार है। बिना पेंशन तो हमारा जीवन चलना मुश्किल है।
लोगों के समक्ष भुखमरी की स्थिति
बड़ा गोविंदपुर बस्ती के लोगों की परेशानी दूर करने में यहां की बेटी देवकी मुर्मू खूब मदद कर रही है। देवकी ने बताया कि पेंशन नहीं मिलने से यहां के लोगों के समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। देवकी गांव के लोगों की समस्या दूर करने के लिए मुखिया लखिया सोरेन, करनडीह ब्लॉक के अधिकारियों और वार्ड सदस्य से गुहार लगा चुकी हैं। लेकिन अभी तक आश्वासन के सिवाय लोगों को कुछ नहीं मिल पाया है।
अधिकारियों का बर्ताव ठीक नहीं
पेंशन के लिए कार्यालयों का चक्कर काटते-काटते थक चुकी हूं। मुखिया, ब्लॉक अधिकारी और वार्ड सदस्य सिर्फ आश्वासन देते हैं। कभी-कभी तो अधिकारियों से बात भी सुननी पड़ती है। अधिकारियों का बर्ताव भी ठीक नहीं है। अब मुझे पेंशन मिलने की आस नहीं के बराबर लगती है। मैं पैर से लाचार हूं। चलने के लिए डंडा ही मेरा सराहा है। बाकी बची जिंदगी भगवान भरोसे काट लूंगी। सालगे मुर्मू
मामला मेरे संज्ञान में नहीं
मुझे जानकारी नहीं है कि बड़ा गोविंदपुर के लोगों को वृद्धा और विधवा पेंशन नहीं मिल रही है। इस मामले को मैं अपने स्तर से देखूंगी। जो लोग पेंशन के हकदार हैं, उन्हें पेंशन मिलनी ही चाहिए। वैसे ब्लॉक स्तर पर पेंशन के लिए शिविर लगाए जाते हैं। रंजना मिश्रा, समाज कल्याण पदाधिकारी