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गुड न्यूज: फरवरी से शहर के भवनों का नक्शा होगा ऑनलाइन

7 वर्ष पहले
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जमशेदपुर. शहर में किसी भवन के नक्शा के बारे में जानकारी लेने के लिए लोगों को अब नगर निकाय कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना होगा। फरवरी से नक्शा से संबंधित तमाम जानकारी ऑनलाइन ही मिलेगी। इसके लिए उपायुक्त कार्यालय स्थित जिला सूचना केंद्र में डाटा फीड करने का काम चल रहा है। जमशेदपुर अक्षेस, मानगो अक्षेस तथा जुगसलाई नगरपालिका प्रशासन की ओर से नक्शा से जुड़े कागजात जिला सूचना कार्यालय को उपलब्ध कराया गया है।

जमशेदपुर अक्षेस को 6 जोन में बांटा

किसी आवेदक को अपने नक्शा के बारे में जानकारी हासिल करने में परेशानी न हो, इसके लिए सभी अधिसूचित क्षेत्र समिति का डाटा अलग-अलग अपलोड किया जा रहा है। जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति का क्षेत्र काफी बड़ा है। इसलिए, इसे छह जोन में बांटा गया है। जोन का निर्धारण शहर के प्रमुख क्षेत्र के आधार पर किया गया है।

अभी क्या है व्यवस्था

अभी भवन का नक्शा जमा कराने के बाद आवेदक को नगर निकाय कार्यालय का कई बार चक्कर लगाना पड़ता है। टाटा लीज क्षेत्र की जमीन होने के बाद टाटा लैंड डिपार्टमेंट को नक्शा जांच के लिए भेजा जाता है। लैंड डिपार्टमेंट से अनुमति मिलने के बाद नक्शा पारित किया जाता है। रैयती जमीन से जुड़े मामले में जमशेदपुर अक्षेस ही अंतिम फैसला लेता है। आवेदन जमा होने के बाद उसका प्राक्कलन बनाया जाता है और उसके आधार पर राशि जमा कराई जाती है। इंजीनियर निर्माण स्थल की जांचकर नक्शा पास करने की अनुशंसा विशेष पदाधिकारी से करते हैं।

क्या होगा फायदा

नई व्यवस्था के तहत नक्शा जमा करने के बाद आवेदक को एक परमिट नंबर दिया जाएगा। आवेदक जिला प्रशासन की वेबसाइट पर जाकर अपना नाम, क्षेत्र और परमिट नंबर टाइप करेंगे, तो उन्हें नक्शा के बारे में विभाग की ओर से होने वाले हर काम की जानकारी मिल जाएगी। इसमें 30 दिनों के अंदर नक्शा पारित कर दिया जाएगा अन्यथा कारण बताते हुए उसे खारिज कर दिया जाएगा। नक्शा पास होने के बाद आवेदक नक्शा से जुड़े सारे कागजात डाउनलोड कर सकेंगे।

फर्जीवाड़ा पर लगेगी रोक

बिल्डर पारित नक्शा से ज्यादा ऊंची इमारत का निर्माण कराते हैं। जिस मंजिल का नक्शा पारित नहीं होता है, उस मंजिल में बने फ्लैट की बिक्री भी कर दी जाती है और जानकारी के अभाव में आम लोग फ्लैट की खरीदारी कर लेते हैं। नक्शा पारित नहीं होने की स्थिति में फ्लैटधारक के पक्ष में झारखंड अपार्टमेंट एक्ट भी प्रभावी नहीं होता है। नई व्यवस्था के बाद खरीदार बिल्डर से नक्शा का परमिट नंबर लेकर खुद ही नक्शा के बारे में जानकारी हासिल कर ठगी से बच सकता है।