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नहीं हो पाया निर्वाचन क्षेत्र पर फैसला, पांच सदस्यों ने की दो घंटे बैठक

6 वर्ष पहले
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जमशेदपुर. टाटा वर्कर्स यूनियन (टीडब्ल्यूयू) चुनाव के लिए निर्वाचन क्षेत्र निर्धारण के लिए चली दो घंटे की बैठक हुई, लेकिन इसमें कोई फैसला नहीं लिया जा सका। निर्वाचन क्षेत्र निर्धारण के लिए शुक्रवार को भी बैठक होगी। बैठक में कर्मचारियों की संख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्र बनाने पर चर्चा हुई। पांच सदस्यों ने अपने-अपने विचार रखे। 60 से 75 कर्मचारियों पर एक निर्वाचन क्षेत्र के निर्धारण पर चर्चा हुई, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ।
13 को प्रारूप का गठन
कमेटी के एक सदस्य ने बताया कि निर्वाचन क्षेत्र का प्रारूप 15 फरवरी को प्रकाशित करना है, इसलिए 13 फरवरी को प्रारूप का गठन हर हाल कर लिया जाएगा। यूनियन की ओर से कई प्रस्ताव प्रशासन को दिए गए हैं। प्रशासन उन प्रस्ताव पर भी गौर कर रहा है। बैठक में एडीसी सह निर्वाची पदाधिकारी सुनील कुमार, जिला स्थापना उप समाहर्ता दिलीप कुमार तिवारी, आईटीडीए के निदेशक परमेश्वर भगत, एसडीओ प्रेमरंजन और डीएलसी एसएस पाठक उपस्थित थे।
सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगा तीसरा मोर्चा : भगवान
टाटा वर्कर्स यूनियन में एसएमडी के कमेटी मेंबर भगवान सिंह ने कहा है कि तीसरा मोर्चा सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगा। उन्होंने कहा कि कमेटी मेंबर के चुनाव के बाद स्वतंत्र रूप से पदाधिकारी का चुनाव लड़ेंगे। मालूम हो कि भगवान सिंह तीसरे मोर्चा का नेतृत्व कर रहे हैं। भगवान सिंह ने कहा कि मतगणना की तिथि नजदीक आएगी, तो बहुत लोगों को मालूम नहीं चलेगा कि उनके नीचे की जमीन खिसक चुकी है।
भगवान सिंह ने कहा कि यूनियन के पिछले चुनाव में उन्होंने पीएन सिंह का साथ दिया था। कुछ मसले पर उनसे विरोध था। वेज रिवीजन समझौता के बाद एनएस ग्रेड के कर्मचारियों का निलंबन हुआ, तो उनके सब्र का बांध टूट गया। एनएस कर्मचारियों के मामले पर ही पीएन सिंह के साथ उनका रिश्ता टूट गया। यकीन है कि इस चुनाव में एनएस कर्मियों साथ मिलेगा।
मजदूरों को न्याय दिलाने का प्रयास करेंगे : रघुनाथ पांडे
टाटा वर्कर्स यूनियन के विपक्ष की बैठक गुरुवार को रघुनाथ पांडे के साकची गरमनाला स्थित आवास पर हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए रघुनाथ पांडे ने कहा कि ढाई साल के अंतराल में सत्ता पक्ष ने मजदूर हित में कोई काम नहीं किया।
जिन मजदूरों को नुकसान हुआ है, उनको न्याय दिलाने का प्रयास करेंगे। हमारी टीम सत्ता में आने पर पहले मजदूरों की नौकरी की सुरक्षा पर बल देगी। उनकी टीम प्रयास करेगी कि कोई मजदूर सरप्लस न हो, ट्यूब और कैंटीन जैसे स्थायी काम आउटसोर्स न हो। एनएस कर्मियों के ग्रेड में सुधार और प्रमोशन का रास्ता साफ किया जाएगा।
कर्मचारी पुत्रों की तीन वर्ष से बंद बहाली को शुरू कराया जाएगा। डिस्चार्ज और सस्पेंड कर्मचारियों को पुन: नौकरी दिलाने का प्रयास किया जाएगा। बैठक में शैलेश सिंह, अरविन्द पांडेय, एसके झा, एसपी सिंह, जगदीश राव, एसएस सग्गू, टीएन ठाकुर, केके सिंह, विमल कुमार, रोहित नंदन, डीएस बावरा आदि उपस्थित थे।
वादा करके भूल गए पीएन : दुबे
एलडी-1 के कमेटी मेंबर एसएन दुबे ने कहा है कि पीएन सिंह और आरएन मिश्रा अपने विभाग के कर्मचारियों से वादा करके भूल गए। दोनों नेता वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को सीएमजी से बाहर करवा कर ऑपरेशन में डलवाने का वादा कर चुनाव जीते थे। लेकिन उसपर चर्चा तक नहीं की। वेस्ट प्लांट में मैन पावर 18 से घटकर नौ हो गया है। कर्मचारियों पर वर्कलोड बढ़ गया है, लेकिन मैनिंग पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
कर्मचारी वर्तमान टीम से आशान्वित : पीएन
पीएन सिंह ने गुरुवार को अपने आवास पर हुई बैठक में कहा कि जिन नेताओं ने न्यायालय में यूनियन को कठघरे में खड़ा करने का काम किया है, चुनाव में कर्मचारी उन्हें बाहर का रास्ता दिखाएंगे। ग्रेड रिवीजन बेहतर होने से कर्मचारी वर्तमान टीम से भविष्य में भी आशान्वित हैं। हमारी टीम भविष्य में कर्मचारियों के हितों के विरुद्ध कोई ऐसा कार्य नहीं करेगी, जिससे कर्मचारियों को सिर झुकाना पड़े। बैठक में एसके चौधरी, सुबोध श्रीवास्तव, शहनवाज आलम उपस्थित थे।
जमशेदपुर लेबर एसोसिएशन के पहले अध्यक्ष और संस्थापक एसएन हलधर के जाने के बाद एसोसिएशन के संचालन की पूरी जिम्मेवारी देशबंधु चित्तरंजन दास के कंधों पर आ गई थी। दास ने एटक के महामंत्री देवन चमन लाल की मदद से टाटा कंपनी के निदेशकों से मिल कर जमशेदपुर के मजदूरों की समस्या का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने की सलाह दी।
1924 में बनी काउंसिलिएशन कमेटी
31 मार्च 1924 को मुंबई के नवसारी बिल्डिंग में टाटा कंपनी के मजदूरों की समस्या के समाधान के लिए काउंसिलिएशन कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया।
कमेटी के अध्यक्ष के रूप में देशबंधु चित्तरंजन दास, देवन चमन लाल, सीएफ एंड्रूज, मनु सूबेदार, डीसी आहुजा, डीसी गुप्ता, रूढ़ सिंह और धावले को सदस्य बनाया गया। काउंसिलिएशन कमेटी एक संपूर्ण समिति थी, जिसमें प्रबंधन, मजदूर, समाजसेवियों और राष्ट्रीय स्तर के नेता व सभी के प्रतिनिधि शामिल थे।
मजदूरों की मांग पर आगे आए
कमेटी द्वारा सर्वसम्मति से दीनबंधु, सीएफ एंड्रूज को जमशेदपुर जाकर वास्तविक स्थिति से अवगत होकर रिपोर्ट देने के लिए अधिकृत किया गया। कुछ समय तक इसी काउंसिलिएशन कमेटी द्वारा टाटा कंपनी के मजदूर वर्ग का नेतृत्व किया गया। टाटा स्टील के मजदूरों की मांग और काउंसिलिएशन कमेटी के अनुराेध पर अंतत: दीनबंधु सीएफ एंड्रूज ने जमशेदपुर लेबर एसोसिएशन का अध्यक्ष पद स्वीकार कर लिया।
महात्मा गांधी ने कराया था सम्मानजनक समझौता
टकराव की स्थिति सुएंड्रूज के प्रयासों से लेबर एसोसिएशन और टाटा स्टील प्रबंधन के बीच उत्पन्न टकराव की स्थिति को सुलझाने के लिए 8 अगस्त 1925 को महात्मा गांधी जमशेदपुर आये। गांधी जी ने दोनों पक्षों के बीच एक सम्मानजनक समझौता कराया।
समझौते के तहत प्रबंधन द्वारा यूनियन को मान्यता दी गयी। इसका मतलब प्रबंधन हमेशा यूनियन का निवेदन सुनने के लिए तैयार रहेगा। दूसरी बात प्रबंधन ने यह भी मानी कि वह मजदूरों के वेतन से चंदा काट कर यूनियन की मदद करेगी।
बिष्टुपुर में यूनियन कार्यालय का हुआ था उदघाटन
गांधीजी ने बिष्टुपुर साउथ पार्क के एक क्वार्टर में कार्यालय का उदघाटन किया। 1925 में लेबर एसोसिएशन का चुनाव हुआ, जिसमें दीनबंधु सीएफ एंड्रूज अध्यक्ष, डीसी आहुजा और डीसी गुप्ता उपाध्यक्ष, जी सेट्टी आैर मणि घोष मानद सचिव और वीजे साठे कोषाध्यक्ष चुने गए। दीनबंधु ने 1928 तक यूनियन का नेतृत्व किया।