पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

डायवोर्स एडवोकेट बनना चाहती हैं रिंकी कुमारी, स्पेन में कांस्य विजेता

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जमशेदपुर। रांची के ओरमांझी के हुटुप गांव की रहने वाली रिंकी कुमारी ने कहा कि वह बड़ी होकर डायवोर्स एडवोकेट (तलाक कराने वाली वकील) बनना चाहती है, ताकि गांव की महिलाओं को नारकीय जीवन से बाहर निकाल सके।
जेवियर लेबर रिलेशन्स इन्स्टीट्यूट (एक्सएलआरआई) में आयोजित टेडेक्स कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंची रिंकी ने दैनिक भास्कर को बताया कि उसका सपना है कि शराबी पतियों से रोज मार खाने वाली महिलाओं को तलाक दिला सकें।

बकौल रिंकी, जब देखती हूं कि मेरे गांव की औरतें रोज अपने शराबी पतियों से पिटी जाती हैं और वे कुछ नहीं कर पाती, तो गुस्सा आता है। अगर वह फुटबॉलर नहीं बन सकी, तो डायवोर्स एडवोकेट बन कर ऐसी महिलाओं को उनकी नारकीय जीवन से बाहर निकालेगी।
रिंकी बताती हैं, उनकी मां तेतरी देवी पढ़ी-लिखी नहीं हैं, लेकिन उन्हें स्कूल भेजना चाहती है। पिता ईंट भट्ठा पर काम करते है। पढ़े-लिखे नहीं थे, तो चाचा ने धोखे से अंगूठा लगवाकर उनकी सारी संपत्ति हड़प ली।
कौन हैं रिंकी कुमारी
रिंकी झारखंड की लड़कियों की फुटबॉल टीम की कैप्टन है। इस टीम ने पिछले साल स्पेन में आयोजित दोनोस्टी कप में कांस्य पदक जीता था। इस टूर्नामेंट में दुनिया भर की 30 देशों की 400 टीमों ने भाग लिया था। झारखंड की टीम में 18 लड़कियां थीं, जो गांव की गरीब लड़कियां हैं।

हवाई जहाज में उड़ान भरी, तो लगा सपने ने उड़ान भरी
रिंकी ने दैनिक भास्कर को बताया कि स्पेन जाना किसी सपने-सा था। आज तक उन्होंने हवाई जहाज को नजदीक से नहीं था। लेकिन जब स्पेन के लिए हवाई जहाज ने उड़ान भरी, तो लगा कि सपने परवाज लेने लगे।

फ्रैंज को जाता है श्रेय
झारखंड में युवा संस्था से जुड़े अमेरिकी नागरिक फ्रैंज गैस्टलर ने गरीब लड़कियों को अंग्रेजी सिखाना शुरू किया। लेकिन इस लैंग्वेज टीचर ने फुटबॉल ट्रेनर बन ऐसा प्रशिक्षण दिया कि स्पेन जाकर लड़कियों ने देश का नाम रौशन कर दिया।

कहते हैं- यह काम आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने इसे पूरा किया। कभी फुटबॉल नहीं खेला, मगर लड़कियों के जज्बे के आगे सबकुछ छोटा पड़ गया। बकौल फ्रैंज, उनका सपना है कि ज्यादा से ज्यादा कोच हों, जो झारखंड के गांव की लड़कियों को ट्रेनिंग दें।