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सिर्फ 70 हजार खर्च कर जीत गए थे दीना बाबा चुनाव, तीन बार बन चुके हैं विधायक

7 वर्ष पहले
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जमशेदपुर. दीनानाथ पांडेय को क्षेत्र के लोग प्यार से दीना बाबा कहते हैं। जमशेदपुर पूर्वी से तीन बार विधायक रहे। 1990 में अंतिम बार विधायक बने। पांच साल पहले नौकरी छोड़ दी थी। तब लोगों से मिले 60-70 हजार रुपए चंदे से ही चुनाव खर्च पूरा हो गया था। अगर अब चुनाव लड़ने का मौका मिला तो? दीना बाबा बुदबुदाते हैं, बहुत मुश्किल है अब। अब तो 50 लाख से एक करोड़ तक खर्च होते हैं। कहते हैं, विभिन्न कंपनियों के सप्लाई मजदूरों के लिए संघर्ष किया। 1980 में टेल्को में तीन हजार सप्लाई मजदूर स्थाई हुए। फिर टाटा स्टील, तार कंपनी, टिनप्लेट समेत कई कंपनियों के मजदूरों को लाभ हुआ।
14 जनवरी को 81 वर्ष के हो जाएंगे
14 जनवरी 2015 को दीना बाबा 81 साल के हो जाएंगे। अब स्वास्थ्य उतना साथ नहीं देता। फिर भी कांपते हाथ से ही सही, अपने शरीर पर भाजपा का पट्‌टा डालना नहीं भूलते। राजनीति में प्रवेश की चर्चा करते ही उनकी आंखों में युवाओं सी चमक आ जाती है। बताते हैं, 1965 में जमशेदपुर आया था। दिसंबर 66 में जनसंघ का सदस्य बन गया। 1972 में पहला चुनाव लड़ा था। जेब खाली। स्वयंसेवक एक-दूसरे के घर जाकर खाते थे और प्रचार करते थे। उस समय हार गया। केदार दास विधायक बने। फिर आपातकाल लग गया। 9 अगस्त 1975 को आपातकाल का विरोध करने पर जेल भेजे गए। 1977 में जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।
पेंशन है बुढ़ापे का सहारा
दीना बाबा विधायक रहते ऑटोरिक्शा से और पैदल घूमते थे। एक सूती झोला कंधे पर लटकता रहता था। उसी में लेटर पैड और मुहर होती थी। जहां जो मिला, तुरंत अनुशंसा पत्र तैयार। लग गई विधायक की मुहर। कोई कार्यालय नहीं। दीना बाबा आज के विधायकों के राजसी ठाठ-बाट पर कहते हैं, जब लाख-करोड़ रुपए खर्च कर कोई विधायक बनेगा, तो यह सब होगा ही। दीना बाबा बिरसानगर में रहते हैं। जमीन के पक्के कागजात नहीं हैं। बस्तियों में रहने वाली आम जनता की तरह उन्हें भी मालिकाना हक का इंतजार है। पूर्व विधायक के नाते मिलने वाला पेंशन ही उनके बुढ़ापे का सहारा है।