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शिक्षकों से कम वेतन पाते हैं शिक्षा पदाधिकारी, नहीं हुई प्रोन्नति

7 वर्ष पहले
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जमशेदपुर. कहने को अवर शिक्षा सेवा संवर्ग के पदाधिकारी हैं, लेकिन राज्यभर के प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (बीईईओ) प्राइमरी टीचर्स से भी कम वेतनमान पा रहे हैं। शिक्षा विभाग ने 23 वर्ष की सेवा देने के बाद भी इन्हें प्रोन्नति नहीं दी, लेकिन इन्हें राजपत्रित से अराजपत्रित करने की तैयारी कर ली है। अवर शिक्षा सेवा के ये पदाधिकारी प्रोन्नति के बाद राज्य शिक्षा सेवा में जाते, लेकिन विभाग द्वारा बनाई गई नई सेवा शर्त के अनुसार अब वे राज्य शिक्षा सेवा में नहीं जा सकेंगे। राज्यभर में अवर शिक्षा सेवा के कुल 714 पद स्वीकृत है। वर्तमान में कुल 682 पदाधिकारी कार्यरत हैं।
ऐसे कम हो गया वेतनमान
अवर शिक्षा सेवा संवर्ग के पदाधिकारियों के नियुक्ति के समय वेतनमान 1600-2780 था। तब प्राथमिक शिक्षकों का वेतनमान 1200-2040 था। इसके बाद पुनरीक्षण में अवर शिक्षा सेवा संवर्ग के सभी पदों का वेतनमान 5500-9000 और प्राथमिक शिक्षकों का वेतनमान 4500-7000 हुआ। जबकि एक जनवरी 2006 के छठे पुनरीक्षण में सभी अवर शिक्षा सेवा संवर्ग के पदाधिकारियों का वेतनमान 5500-9000 ही रहने दिया गया। जबकि प्राथमिक शिक्षकों का उत्क्रमित वेतनमान 6500-10500 रुपए कर दिया गया। जबकि प्राथमिक शिक्षकों का नियंत्री पदाधिकारी अवर शिक्षा सेवा संवर्ग के पदाधिकारी होते हैं।
योग्यता में भी है अंतर
प्राथमिक शिक्षकों और अवर शिक्षा सेवा संवर्ग के पदाधिकारियों के न्यूनतम योग्यता में भी काफी अंतर है। इसके बाद भी प्राथमिक शिक्षक वेतनमान में इनसे आगे हैं। अवर शिक्षा सेवा के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातक प्रशिक्षित है जबकि प्राथमिक शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता इंटर प्रशिक्षित है। पूर्व में अवर शिक्षा सेवा संवर्ग के पदाधिकारियों का शिक्षकों से हमेशा वेतनमान अधिक रहा है।
वित्त विभाग नहीं ले रहा निर्णय
एचआरडी ने वित्त विभाग को प्रस्ताव दिया है कि अवर शिक्षा सेवा के पदाधिकारी प्राथमिक शिक्षकों का नियंत्री पदाधिकारी होते है। इसलिए इनके वेतनमान को उत्क्रमित करते हुए ग्रेड पे इनका 4800 किया जाए। लेकिन वित्त विभाग संचिका पर कोई निर्णय नहीं ले रहा है। बल्कि संचिका में अनावश्यक अवरोध उत्पन्न किया जा रहा है। इसके अवर शिक्षा सेवा संवर्ग संघ विरोध करता है।'' -राम प्रसाद महतो, अध्यक्ष, झारखंड अवर शिक्षा सेवा संघ