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डाउनलोड करेंजमशेदपुर. माइकल जॉन प्रेक्षागृह (बिष्टुपुर) में लघु फिल्म 'आह' के प्रीमियर शो का मंच राजनीतिक अखाड़ा बन गया। सिंहभूम केंद्रीय वरिष्ठ नागरिक समिति की ओर से बनाई गई इस फिल्म के उद्घाटन समारोह में राजनीतिक नेताओं ने एक-दूसरे की जमकर खिंचाई की। फिल्म देखने आए दर्शक भी इस जुबानी वार को देख हैरान थे।
समारोह के मुख्य अतिथि जमशेदपुर के सांसद डॉ अजय कुमार थे। बतौर विशिष्ट अतिथि ईचागढ़ के विधायक अरविंद सिंह, भाजपा नेता और जमशेदपुर सिटीजन फोरम के एके श्रीवास्तव और आजसू नेता चंद्रगुप्त सिंह मंच पर बैठे थे। फिल्म के उद्घाटन के बाद सांसद ने बीपीएल (बिलो पॉवर्टी लाइन) पर आधारित इस फिल्म की थीम पर कहा कि आज भी जनता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं है, जिससे उनका बीपीएल कार्ड नहीं बनता।
जन प्रतिनिधि भी उनकी समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं होते। ऐसे में 'अपना देश महान बोलने से ज्यादा जरूरी है कि जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र से ही बदलाव की शुरूआत करें। इसके बाद डॉ अजय कुमार कार्यक्रम को बीच में छोड़ एक इफ्तार पार्टी में शामिल होने चले गए। कार्यक्रम में स्वागत भाषण शिवपूजन सिंह और धन्यवाद ज्ञापन अरविंद विद्रोही ने किया।
वे आह क्या समझेंगे... : चंद्रगुप्त
आजसू नेता चंद्रगुप्त सिंह ने सांसद को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे 'आह.. क्या समझेंगे। उन मां-बहनों से पूछिए, जब डॉ अजय कुमार के एसपी रहते हुए उनकी 'आह निकली। यहां के लोगों ने उन्हें सांसद भी बनाया, लेकिन उन माताओं और बहनों की हालत वैसी ही है। भाजपा नेता एके श्रीवास्तव ने दुष्यंत कुमार के एक शेर के जरिए शहर की बिगड़ती स्थिति की ओर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि फिल्म के निर्माताओं को फिल्म का हीरो डॉ अजय कुमार को बनाना चाहिए था, ताकि उन्हें 'आह.. का पता चल सके।
बीपीएल पर आधारित है फिल्म
फिल्म बीपीएल कार्ड पर आधारित है। फिल्म में दिखाया गया है कि समाज में वैसे भी लोग हैं, जो बीपीएल कार्डधारी नहीं है, लेकिन अन्न और दवा के अभाव में मरने को मजबूर हैं। फिल्म का निर्देशन संजय भारती ने किया है। फिल्म के कलाकारों में अन्नू शर्मा, दीपांजलि ओझा, ज्योति पांडेय, रौनक कुमार वर्मा व बंटी शर्मा शामिल हैं।
व्यवस्था से सभी भर रहे क्रआह : अरविंद
झाविमो नेता सह ईचागढ़ विधायक अरविंद सिंह ने कहा कि आज की व्यवस्था से हर कोई पीडि़त है। सभी आह भर रहे हैं। राज्य सरकार की सारी योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई हैं और कमीशनखोरी चरम पर है। जिस नेता के पास खाने को नहीं था, वह कुबेर बन गया है। मिड-डे मील से लेकर जनवितरण प्रणाली, दाल-भात योजना और लक्ष्मी लाडली सरीखी सारी योजनाएं भ्रष्टाचार में लिप्त हैं।
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