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सरकारी कर्मियों का लटकेगा वेतन, कर्मचारी हड़ताल पर

7 वर्ष पहले
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जमशेदपुर. झारखंड राज्य अनुसचिवीय कर्मचारी संघ के आह्वान पर समाहरणालय संवर्ग के कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब जनता के साथ अधिकारियों पर भी पडऩे लगा है। हड़ताल के कारण जिले में पदस्थापित उपायुक्त सहित सभी प्रशासनिक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों को जनवरी का वेतन समय पर नहीं मिलने की आशंका है।

मालूम हो कि हर माह वेतन बनाने का काम जिला स्थापना शाखा करता है। स्थापना शाखा के प्रधान सहायक सहित सभी कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इसलिए वेतन बनाने का काम नहीं हुआ है और महीना समाप्त होने में मात्र तीन दिन बचे हैं। स्थापना शाखा का वेतन बनाने के बाद कोषागार से विपत्र के आधार पर वेतन की निकासी की जाती है। कोषागार में समाहरणालय संवर्ग के कर्मचारी पदस्थापित किए जाते हैं, जो हड़ताल पर हैं।

जमीन-मकान का रजिस्ट्रेशन भी होगा बाधित

हड़ताल के लंबा चलने पर जमीन-मकान के निबंधन पर भी असर पडऩा तय माना जा रहा है। कोषागार से स्टाम्प की निकासी हर मंगलवार को होती है। 21 जनवरी को स्टंप की निकासी की जानी थी। लेकिन, उसी दिन से हड़ताल शुरू हो गई, जिसके कारण स्टाम्प की निकासी नहीं हो सकी। इसलिए, अब बाजार में स्टाम्प की किल्लत होने का अंदेशा है।

मंगलवार को भी जारी रहा धरना

इधर, हड़ताली कर्मचारियों का धरना मंगलवार को भी जारी रहा। उपायुक्त कार्यालय परिसर में धरना की अगुवाई कर रहे संघ के जिलाध्यक्ष नवीन कुमार ने बताया कि एक ओर सरकार बर्खास्त करने की धमकी देती है और दूसरी ओर वार्ता के लिए आमंत्रित करती है। सरकार की नीति स्पष्ट नहीं है। 31 जनवरी को उन्हें वार्ता के लिए बुलाया गया है।

एक फरवरी के बाद बिगड़ सकती है स्थिति

राज्य सरकार के परिवहन, शिक्षा, कल्याण, निबंधन समेत कई विभागों में हड़ताल नहीं है, क्योंकि इन कार्यालयों में समाहरणालय संवर्ग के कर्मचारी पदस्थापित नहीं होते हैं। इन विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों की वेतन निकासी कोषागार के मार्फत की जाती है। कोषागार के कर्मियों के हड़ताल के कारण इन विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों को जनवरी का वेतन नहीं मिलेगा। दूसरी ओर, एक फरवरी के बाद मनरेगा, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, सांसद विकास निधि, विधायक विकास निधि, सम विकास योजना, पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि की राशि की भी निकासी बाधित होगी।