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नए शैक्षणिक सत्र में होंगे कई बदलाव, इंटर पास भी कर सकेंगे बीएड-एमएड

7 वर्ष पहले
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जमशेदपुर। नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजुकेशन (एनसीटीई) नए शैक्षणिक सत्र से बीएड-एमएड में कई बदलाव करने जा रही है। इसके तहत बीएड-एमएड की कोर्स अवधि एक वर्ष से बढ़ाकर दो वर्ष कर दी जाएगी। साथ ही इंटीग्रेटेड ग्रेजुएशन व इंटीग्रेटेड मास्टर (पीजी) डिग्री की भी शुरुआत होगी। इन इंटीग्रेटेड कोर्स में 55 प्रतिशत अंकों के साथ इंटरमीडिएट पास युवा आवेदन कर सकते हैं।
गजेट में दी गई जानकारी
एक दिसंबर 2014 को जारी गजेट ऑफ इंडिया में एनसीटीई के इस बदलाव के साथ ही देश भर के बीएड-एमएड कॉलेजों की आधारभूत संरचना में परिवर्तन करने की बात कही गई है। इसके तहत कॉलेजों में प्रत्येक 50 विद्यार्थियों के लिए एक कक्षा, एक मल्टीपर्पज हाल, लाइब्रेरी, लैब, प्रिंसिपल कार्यालय, स्टॉफ कक्ष, प्रशासनिक कार्यालय, आगंतुक कक्ष, पुरुष व महिला विद्यार्थियों के लिए अलग कॉमन रूम व टॉयलेट, कैंटीन, खेल मैदान, अतिरिक्त आवास के लिए जगह अनिवार्य होगी।
कैसा होगा कोर्स
इंटीग्रेटेड ग्रेजुएशन
अवधि : चार वर्ष
डिग्री : स्नातक के साथ बीएड

इंटीग्रेटेड पीजी
अवधि : पांच वर्ष
डिग्री : स्नातक के साथ बीएड व एमएड
अब बीएड में रहेंगे 16 स्टाफ
एनसीटीई के नए नियम के अनुसार, अब बीएड कॉलेज में 16 स्टाफ रखना अनिवार्य होगा। इसमें एक प्रिंसिपल या विभागाध्यक्ष, चार सहयोगी स्टाफ, आठ शिक्षक (विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान तथा भाषा), स्वास्थ्य तथा शारीरिक शिक्षक (एक-एक), ललित कक्षा शिक्षक (एक), नृत्य-संगीत के लिए एक शिक्षक रखना अनिवार्य होगा। अभी बीएड में आठ शिक्षक रखने का प्रावधान है।
बदलेगा सिलेबस
बीएड-एमएड के दो वर्ष होने के साथ ही सिलेबस में भी बदलाव होगा। इसके लिए एनसीटीई की ओर से सभी यूनिवर्सिटी व कॉलेजों में सूचना भेजी जा रही है। अब प्रत्येक वर्ष में कम से कम 200 कार्य दिवस होंगे, जिसमें प्रवेश तथा परीक्षा की अवधि सम्मिलित नहीं है। कॉलेज में हर सप्ताह कम से कम 36 घंटे (पांच या छह दिन) कार्य होगा, जिसमें सभी शिक्षकों व विद्यार्थियों की उपस्थिति अनिवार्य होगी।
अगले साल से बीएड-एमएड दो वर्ष का हो जाएगा। साथ ही चार वर्षीय व पंचवर्षीय इंटीग्रेटेड ग्रेजुएशन व पीजी कोर्स की भी शुरुआत होगी। यह निर्णय काउंसिल की क्षेत्रीय मीटिंग में हो चुका है। साथ ही इसका प्रकाशन द गजेट ऑफ इंडिया में हो चुका है। यह बदलाव बीएड-एमएड की शिक्षा को क्वालिटी पूर्ण बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
डॉ शुक्ला मोहंती, सदस्य, एनसीटीई सह केयू की प्रोवीसी