जमशेदपुर. बागबेड़ा व छोटा गोविंदपुर ग्रामीण नई जलापूर्ति योजना के शुरू होने में आने वाली बाधा को देखते हुए अब झारखंड सरकार ने योजना का काम जल्द शुरू करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मुख्य सचिव राजीव गौबा को जल्द योजना का काम शुरू करने का निर्देश दिया है। सीएम के इस आदेश के बाद अब पेयजल व स्वच्छता विभाग ने दोनों ग्रामीण जलापूर्ति योजना के संबंध में जमशेदपुर प्रमंडल से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
जमशेदपुर प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता सुरेश प्रसाद ने बताया कि प्रमंडल स्तर से योजना की पूरी रिपोर्ट तैयार कर पीएचईडी के सचिव एपी सिंह के पास भेजा जाएगा। तकनीकी पेंच को दूर करने के लिए झारखंड सरकार ने दोनों जलापूर्ति योजना पर केंद्र सरकार द्वारा खर्च की जाने वाली कुल लागत की 33 फीसदी राशि का खुद वहन करने का फैसला लिया है। ऐसे में राज्य सरकार दोनों योजना की विस्तृत रिपोर्ट की जांच करने के बाद जल्द ही काम धरातल पर शुरू करने का आदेश दे सकती है। योजना का काम पुराने डीपीआर के तहत ही शुरू होगा।
विश्व बैंक व झारखंड सरकार ही अब देगी राशि
पीएचईडी को बागबेड़ा व ग्रामीण जलापूर्ति योजना के लिए अब विश्व बैंक व झारखंड सरकार ही राशि देगी। पहले भारत सरकार की हिस्सेदारी 33 फीसदी की थी। इसमें पूरी योजना के लिए विश्व बैंक 50 फीसदी, भारत सरकार 33 फीसदी, झारखंड सरकार को 16 फीसदी व ग्रामीणों को एक फीसदी राशि देनी थी। लेकिन, अब केंद्र सरकार की हिस्सेदारी राज्य सरकार वहन करेगी, इस स्थिति में झारखंड सरकार को अब पूरी योजना की कुल लागत की 49 फीसदी राशि देनी पड़ेगी।
132 लीटर बनाम 70 लीटर के पेंच में लटकी थी योजना
बागबेड़ा व छोटा गोविंदपुर ग्रामीण जलापूर्ति योजना की 212 करोड़ रुपए की डीपीआर में यह प्रावधान है कि दोनों योजना की आबादी शहरी है। ऐसे में योजना के अंतर्गत लाभान्वित होने वाले क्षेत्र बागबेड़ा व छोटा गोविंदपुर को शहरी क्षेत्रों की तरह ही प्रति व्यक्ति पानी की खपत 132 प्रति लीटर रोजाना के हिसाब से निर्धारित किया गया है। लेकिन, केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र होने का हवाला देते हुए दोनों योजना के लिए प्रति व्यक्ति रोजाना पानी की खपत 70 लीटर होने का सुझाव देते हुए योजना पर आपत्ति जताई थी। इससे योजना का काम शुरू होने में अड़चन आ गई थी।
276 करोड़ का टेंडर हो चुका है
बागबेड़ा व छोटा गोविंदपुर ग्रामीण जलापूर्ति योजना के लिए झारखंड सरकार द्वारा 276 करोड़ रुपए का टेंडर तक पूरा कर लिया गया है। विश्व बैंक की ओर से योजना पर किसी प्रकार की कोई आपत्ति नहीं है। विश्व बैंक की टीम लगातार योजना का काम शीघ्र शुरू करने के लिए झारखंड सरकार पर दबाव दे रही है।
इन क्षेत्रों की आबादी को फायदा
योजना पूरी होने पर बागबेड़ा, कीताडीह, हरहरगुट्टू, घाघीडीह, करनडीह, परसुडीह, सरजामदा, छोटा गोविंदपुर, राहरगोड़ा व गदड़ा समेत कई अन्य क्षेत्र में रहने वाले लगभग तीन लाख की आबादी को पानी मिलेगा। बागबेड़ा हाउसिंग कॉलोनी को छोड़ दें, तो इन सभी क्षेत्रों की आबादी अभी चापाकल पर निर्भर है।
चापाकलों का वाटर लेवल जांचने का आदेश
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में गर्मी में होने वाले जलसंकट से निपटने के लिए पेयजल व स्वच्छता विभाग (पीएचईडी) द्वारा तैयारी की जा रही है। विभाग के जमशेदपुर अंचल के अधीक्षण अभियंता राजेंद्र प्रसाद ने सभी डिवीजन के कार्यपालक अभियंताओं को मार्च तक सभी क्षेत्रों में चापाकलों के वाटर लेवल (जलस्तर) की जांच करने का निर्देश दिया है। साथ ही प्रमंडल स्तर पर एक सेल गठन करने का आदेश दिया गया है। अधीक्षण अभियंता ने बताया कि गर्मी बढ़ने पर जलस्तर नीचे जाने की शिकायत मिलती है।
चापाकल की स्थिति व वाटर लेवल की शिकायत सेल से की जा सकेगी। इससे विभाग को गर्मी में जल संकट पर काबू पाने में सहायता होगी। इसलिए सभी प्रमंडल को मार्च तक गर्मी में होने वाली जल समस्याओं पर काबू पाने के उद्देश्य से जल्द सेल गठन करने को कहा गया है।