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झारखंड के दादा साहेब फाल्के थे फादर स्टीफन वेन विंकल

9 वर्ष पहले
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रांची .जिस तरह दादा साहेब फाल्के ने 1913 में भारत की पहली फिल्म का निर्माण कर भारत का नाम सेल्युलाइड के क्षेत्र में स्वर्णाक्षरों में अंकित किया,

उसी प्रकार झारखंड में सबसे पहले सेल्युलाइड पर डॉक्यूमेंट्री फिल्म का निर्माण 60 के दशक में फादर स्टीफन वेन विंकल ने किया था।

फादर विंकल को फोटोग्राफी का शौक था। झारखंड की संस्कृति से उतना ही लगाव था। बेल्जियम में 1920 में जन्मे स्टीफन सेवा भावना लिए 1954 में भारत आए। संत जेवियर्स कॉलेज से जुड़े। बरसर (खजांची) के रूप में उन्होंने संत जेवियर्स कॉलेज को आत्मनिर्भर बनाया।

संभाल कर रखी थी फिल्में
फादर स्टीफन वेन वंकल को अपनी डॉक्यूमेंट्री फिल्मों, पुराने कैमरों, रीलों और प्रोजेक्टर से गहरा लगाव था। अपने कमरे में उन्होंने इन्हें संभाल कर रखा है। संत जेवियर्स कॉलेज मास कम्युनिकेशन के 2007-10 बैच के छात्रों सेराल मुर्मू और कुंदन मुंडा ने फादर स्टीफन वेन विंकल के जीवन पर 'आवर फाल्के फिल्म बनाई। इस फिल्म को शाइनोश्योर फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित किया गया था।

सेल्यूलाइड चैप्टर की ओर से फादर को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड भी मिला था। उनके निधन पर कार्डिनल तेलेस्फोर पी टोप्पो, संत जेवियर कॉलेज के प्रिंसिपल फादर एन टेटे, एन लकड़ा, फादर पीटर पाल, फिल्मकार मेघनाथ, बिजू टोप्पो व अनिल सिकदर ने शोक जताया है।

लोगों की मदद में हमेशा आगे रहते
॥फादर स्टीफन वेन विंकल का निधन सभी के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने हमेशा गरीबोंं की मदद की। कॉलेज के विकास में उनका अहम योगदान रहा है। उनके जैसा शिक्षाविद और फिल्मकार का जाना बड़ी क्षति है।ञ्जञ्ज
तेलेस्फोर पी टोप्पो, कार्डिनल