जमशेदपुर। पीयूष मिश्रा, प्रकाश अय्यर, संध्या अय्यर, सुनील खंडबहाले, अनुज गोसालिया, फ्रैंज गैस्टलर, गोपाल खन्ना और ज्योत्स्ना जगन्नाथन। नाम और काम भले ही अलग-अलग हो, मगर इन जांबाजों ने जुदा राह अपनाकर एक अलग पहचान बनाई है। जेवियर लेबर रिलेशन्स इन्स्टीट्यूट (एक्सएलआरआई) जमशेदपुर में मंगलवार को आयोजित टेडेक्स में इन लोगों की सक्सेस स्टोरी से भावी प्रबंधक रूबरू हुए।
2020 तक 10 करोड़ लोगों तक पहुंच : सुनील
मल्टीलिंग्वल ट्रांसलेशन प्लेटफॉर्म बनाकर दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाले सुनील खंडबहाले ने कहा कि उनका सपना ऐसा ट्रांसलेशन प्लेटफॉर्म बनाना है, जो हर भाषा के जानने-समझने वालों को दूसरी भाषा को जानने का मौका दे सके।
सुनील ने बताया कि मराठी माध्यम से उनकी पढ़ाई हुई। उनमें भी अंग्रेजी को लेकर कॉम्पलेक्स था। इसी कॉम्पलेक्स ने उन्हें इस प्लेटफॉर्म को बनाने का आइडिया दिया। अब सपना है कि कोई किसी भी भाषा में बोले, मगर वह अनुवादित होकर लोगों को उनकी भाषा में मिले। हमारा लक्ष्य 2020 तक 10 करोड़ लोगों तक पहुंचने का है।
इम्तियाज अली की फिल्म तमाशा में अदाकारी का जलवा बिखरेंगे पीयूष मिश्रा
अभिनेता, गीतकार और लेखक पीयूष मिश्रा ने बताया कि वे करन जौहर की फिल्म शुद्धि के लिए स्क्रिप्ट लिख रहे हैं। उनकी एक अन्य फिल्म ट्रैफिक भी आ रही है। वे जमशेदपुर के फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली की फिल्म तमाशा (रणवीर कपूर और
दीपिका पादुकोण अभिनीत) के साथ तेरे बिन लादेन के पार्ट-2 में अदाकारी का जलवा बिखेरने जा रहे हैं।
काफी मुश्किल होती है उनके जैसे निर्देशकों को
पीयूष ने बताया कि उनके जैसे निर्देशकों को बॉलीवुड में काम करने में काफी मुश्किल होती है। बकौल मिश्रा, वे कला के साथ कोई समझौता नहीं कर सकते। कई बार काम पाने के लिए गिरना पड़ता है, जो उन्हें पसंद नहीं है। ऐसे में अच्छे काम के लिए कई बार इंतजार करना पड़ता है।
नए निर्देशकों की फिल्मों में नयापन
पीयूष ने कहा कि नए निर्देशकों की जो पौध आई है, वह काफी टैलेंटेड है और वह कुछ अलग करना चाहती है। वह फार्मूला वाली फिल्मों में बंधे रहना नहीं चाहती। अनुराग कश्यप ने कमाल की फिल्में की हैं। यही कारण है कि उनके साथ काम किया है।
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