जमशेदपुर. दिवाली का दिन था। मैंने हिम्मत करके पापा से कहा कि मैं नौकरी रिजाइन कर रहा हूं। मेरी बात सुनते ही पापा के होश उड़ गए। मेरी बात सुनकर मां लगातार रोती रही। वह कह रही थी, क्यों कॅरिअर से खिलवाड़ कर रहे हो? कोई लड़की तुमसे शादी नहीं करेगी। लेकिन 10 मिनट के बाद पापा ने जो कहा, उस एक बात ने मेरी जिंदगी का मकसद बदल दिया। उन्होंने कहा-जो करना है तुम करो, हम सपोर्ट करेंगे। पापा की इन बातों में मेरे सपने दिखे।
मैंने सालाना 30 लाख रुपए पैकेज की नौकरी एक पल में छोड़ दी। दिल्ली के पंकज जैन की यह रियल स्टोरी वैसे युवाओं के लिए एक मिसाल है, जो समाज और देश के लिए कुछ करना चाहते हैं। एक्सएलआरआई में एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे पंकज जैन ने बताया, 24 साल में मुझे जो पैकेज मिल रहे थे, उतना पैकेज मेरे पिता को आईआईटी में 35 साल नौकरी करने के बाद मिलता था।
मोदी जी से पहले मेक इन इंडिया कर रहा हूं : पंकज जैन पिछले 5 साल से मेक इन इंडिया को हकीकत बना रहे हैं। उनके सहयोग से अब तक 200 सामाजिक उद्यम शुरू हुए हैं।
जमकर मेहनत की : पंकज बताते हैं कि नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने जमकर मेहनत की। सामाजिक उद्यमियों को मदद देने के लिए इंपैक्ट लॉ वेंचर्स बनाया। वैसे युवाओं को कानूनी सलाह देनी शुरू की। बकौल पंकज, अधिकतर युवा कानूनी पेंच की वजह से अपना उद्यम शुरू नहीं कर पाते, जबकि उनके पास नया आइडिया होता है। मैंने ऐसे युवाओं को मंच दिया, जहां नया उद्यम शुरू करने में उन्हें सहूलियत हो।
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