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99 प्रतिशत पार्षद हैं निगम चुनाव के खिलाफ, फ्रेश चुनाव कराने का है प्रस्ताव

7 वर्ष पहले
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आदित्यपुर. आदित्यपुर को नगर निगम बनाने की राह में अभी बाधा है। यहां के लगभग 99 फीसदी पार्षद व अध्यक्ष फिलहाल चुनाव के मूड में नहीं है। मालूम हो कि नगर विकास विभाग ने वर्ष 2011 के जनगणना को आधार बनाकर आदित्यपुर नगर पर्षद को नगर निगम में तब्दील करने का प्रस्ताव शनिवार को पारित कर दिया है, साथ ही इस संबंध में उपायुक्त को भेजे गए पत्र में इस बात की मांग यहां से नागरिकों से की गई है, कि वे 30 दिनों तक इस प्रस्ताव के विरोध व समर्थन में आपत्ति एवं सुझाव उपायुक्त कार्यालय में दे सकते हैं। इधर नगर पर्षद का चुनाव हुए अभी डेढ़ वर्ष ही बीते हैं। ऐसे में यहां के पार्षद और अध्यक्ष पहले ही इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए बोर्ड की बैठक में अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं। अब यहां के आम नागरिक ही इस प्रस्ताव को हरी झंडी देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
आगे क्या
नगर पर्षद आदित्यपुर ने मार्च में ही वृहत नगर निगम का नक्शा तैयार कर नगर विभाग को भेज चुका है। इसमें कुल क्षेत्र 49 किलोमीटर दर्शाया गया है। जनसंख्या में पुरुष की संख्या 82 हजार 493 व महिलाओं की 91 हजार 289 बताई गई है। वर्ष 2013/14 के राजस्व के विवरण में संपत्ति कर के रूप में 30 लाख 213 हजार रुपए, म्युनिसिपल टैक्स से 2 करोड़ 48 लाख 411 रुपए बताया गया है। जबकि लक्ष्य 7 करोड़ 94 लाख रखा गया था। इसी के मद्देनजर नगर विकास विभाग ने यहां नगर निगम बनाने का प्रस्ताव को मंजूर किया है।
मेरे ख्याल से नगर पर्षद का गठन हुए अभी डेढ़ साल ही हुए हैं। ऐसे में नगर निगम की फार्मेलिटी अपनाई जाए, लेकिन चुनाव नगर पर्षद का टर्म होने के बाद ही कराया जाए। अन्यथा यहां के दो लाख परिवारों द्वारा चुने गए बोर्ड की अवहेलना होगी। जिस आशा व भरोसा के साथ जनता ने बोर्ड का गठन किया है उसे पूरा करने के लिए हमें पूरा समय मिलना चाहिए, हमने पार्षदों की राय व अपनी राय से नगर विकास विभाग को भी अवगत करा दिया है। राधा सांडिल, अध्यक्ष नप आदित्यपुर।